आपदा पीड़ितों की हर संभव मदद के लिए उनके साथ खड़ा है प्रशासन: एसडीएम

आपदा पीड़ितों की हर संभव मदद के लिए उनके साथ खड़ा है प्रशासन: एसडीएम
कॉफी विद एसडीएम. आपदा पीड़ितों की समस्याएं एसडीएम ने सुनीं, मदद का दिया भरोसा प्रतिनिधि, गढ़वा सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार के नियमित साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम कॉफी विद एसडीएम के तहत बुधवार को अनुमंडल सभा कक्ष में एक संवेदनशील बैठक आयोजित की गयी. बैठक में अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न प्रखंडों से आये आपदा प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. लोगों ने अपने अपनों को खोने के दर्दनाक अनुभव साझा किये और मुआवजा एवं अन्य सहायता से जुड़े मुद्दों को रखा, जिन्हें एसडीएम ने बड़ी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना. कार्यक्रम में शामिल अधिकांश लोग ऐसे थे, जिन्होंने अपने परिजनों को सड़क दुर्घटना, वज्रपात, सर्पदंश, डूबने, आगजनी या अन्य आपदाओं में खो दिया था. कुछ लोगों ने अपने पशुओं की मृत्यु, घर में आग लगने से संपत्ति के नुकसान और अन्य आर्थिक-सामाजिक समस्याएं भी रखीं. एसडीएम ने सभी उपस्थित लोगों को अपना संपर्क नंबर उपलब्ध कराते हुए कहा कि प्रशासन हर संभव सहायता के लिए उनके साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि जनहानि की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन पीड़ित परिवारों के दुख को कम करने के लिए प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगा. मेराल के डॉ लालमोहन ने अपने इकलौते पुत्र की वज्रपात से हुई मृत्यु का जिक्र किया और अब तक मिली प्रशासनिक सहायता पर संतोष व्यक्त किया. मझिआंव के उदय राम ने बताया कि उनका पुत्र नदी में डूब गया और वर्तमान में उन्हें अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है. गढ़वा हंसकेर निवासी विजय कुमार तिवारी ने सड़क दुर्घटना में अपने जवान बेटे की मृत्यु का मामला उठाया, जिस पर उन्हें ट्रिब्यूनल तक जाने की सलाह दी गयी. करुआ कला के रामानंद उपाध्याय, वीरबंधा की रीना देवी, डुमरसोता निवासी विनोद कुमार, लखेया मेराल निवासी रामकली, रजहारा निवासी जुगलराज, वशिष्ठ विश्वकर्मा, शत्रुघ्न उरांव, अली हुसैन अंसारी, त्रिभुवन राम, लुकमान अंसारी, राजेंद्र यादव, विषम्भर कुमार, पति प्रजापति, इस्लाम अंसारी, प्रदीप राम और मुकेश कुमार यादव ने भी अपनी समस्याएं रखीं. इनमें से कई मामलों में बच्चों के पालन-पोषण, मुआवजा और सरकारी सहायता में देरी की शिकायत सामने आयीं, जिस पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये गये. कार्यक्रम में आपदा राहत से जुड़े जिला स्तरीय पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी कार्यालय के कर्मी तथा अनुमंडल कार्यालय के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे. सभी पीड़ित परिवारों की समस्याओं को विस्तार से सुना गया और प्रशासन द्वारा त्वरित समाधान और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए. सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश युवा बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों में अधिकांश युवा (18 से 25 वर्ष आयु वर्ग) शामिल हैं. इस पर एसडीएम ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को बाइक देने से पहले उन्हें यातायात नियमों के प्रति जागरूक करें, हेलमेट का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित कराएं और नशे व लापरवाही से बचने के लिए प्रेरित करें.
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