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जिले में 9.29 करोड़ खर्च, फिर भी बेकार पड़े 5518 नाडेप

Updated at : 07 Nov 2025 9:22 PM (IST)
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जिले में 9.29 करोड़ खर्च, फिर भी बेकार पड़े 5518 नाडेप

ग्रामीणों में जागरूकता की कमी और गलत स्थल चयन बना योजना की विफलता का कारण

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ग्रामीणों में जागरूकता की कमी और गलत स्थल चयन बना योजना की विफलता का कारण पीयूष तिवारी, गढ़वा गढ़वा जिले में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा 5518 नाडेप का निर्माण कराया गया, जिस पर कुल 9.29 करोड़ रुपये खर्च किये गये, लेकिन योजना का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच सका. अधिकांश गांवों में बने नाडेप आज भी बेकार पड़े हैं. जानकारी के अनुसार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 2518 नाडेप का निर्माण प्रति यूनिट 21,900 रुपये की दर से किया, जिस पर 5.51 करोड़ रुपये खर्च हुए. वहीं, मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की मद से 3000 नाडेप का निर्माण 12,618 रुपये प्रति यूनिट की दर से कर 3.78 करोड़ रुपये खर्च किये गये. कुल मिलाकर जिले में इस योजना पर 9.29 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गयी. जिले के लगभग सभी गांवों में नाडेप टांकों का अधिष्ठापन तो कर दिया गया, लेकिन ग्रामीण यह तक नहीं जानते कि इनका उपयोग कैसे किया जाये. नतीजतन, यह योजना सिर्फ कागजों और राशि निकासी तक सीमित रह गयी है. इसके अलावा कई स्थानों पर अधिष्ठापन स्थल भी उपयुक्त नहीं चुना गया, जिससे इनका उपयोग व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो सका. क्या है नाडेप नाडेप एक जैविक खाद बनाने की पारंपरिक तकनीक है, जिसे महाराष्ट्र के किसान नारायण देवराव पानधारी पांडेय ने विकसित किया था. उनके नाम के आधार पर ही इसे नाडेप कहा गया. इसमें कम गोबर और खेत की बची सामग्री जैसे घास-फूस, पत्ते आदि का उपयोग कर 90 से 120 दिनों में सस्ती व प्राकृतिक खाद तैयार की जाती है. इसके लिए 10 फीट लंबा, छह फीट चौड़ा और तीन फीट गहरा ईंटों का टांका बनाया जाता है. अवेयरनेस की कमी से नहीं हो रहा है उपयोग : ईई इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता अजय कुमार सिंह ने कहा कि इस योजना का मॉडल प्राक्कलन उन्हीं के विभाग द्वारा 21900 रूपये का बनाया गया है, लेकिन मनरेगा व 15वें वित्त से यह कितने में बना है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. उन्होंने कहा कि नाडेप के बारे में ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया गया है, लेकिन जागरूकता की कमी की वजह से इसका उपायोग नहीं किया जा रहा है. वैसे यह योजना वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के मामले में काफी अच्छी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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