संस्कारहीन लोगों का बढ़ना देश के लिए खतरा

Published at :26 Oct 2016 1:12 AM (IST)
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संस्कारहीन लोगों का बढ़ना देश के लिए खतरा

जगतगुरु रामानुजाचार्य विद्या भास्करजी से खास बातचीत गढ़वा : देश में विजातीय तत्वों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. जबकि सभ्य बुद्धिजीवियों की संख्या घट रही है.जनसंख्या का यह असंतुलन देश को खतरे में डाल रहा है. यह बात श्रीश्री 1000 श्री त्रिदंडी स्वामीजी महाराज की गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ानेवाले जगतगुरु रामानुजाचार्य विद्या […]

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जगतगुरु रामानुजाचार्य विद्या भास्करजी से खास बातचीत
गढ़वा : देश में विजातीय तत्वों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. जबकि सभ्य बुद्धिजीवियों की संख्या घट रही है.जनसंख्या का यह असंतुलन देश को खतरे में डाल रहा है. यह बात श्रीश्री 1000 श्री त्रिदंडी स्वामीजी महाराज की गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ानेवाले जगतगुरु रामानुजाचार्य विद्या भास्करजी महाराज जी ने कही. गढ़वा में नौ दिवसीय श्रीबाल्मिकी रामायण कथा सुनाने आये विद्या भास्करजी महाराज प्रभात खबर से विशेष बातचीत कर रहे थे.
उन्होंने विजातीय तत्वों को और स्पष्ट करते हुए कहा कि देश में जो संस्कारवान और सभ्य परिवार हैं, वहां जन्म दर काफी धीमी है. लेकिन दूसरी ओर अशिक्षित और संस्कारहीन लोगों की जनसंख्या वृद्धि दर काफी ऊंची है. यह चिंता का विषय है. विद्या भास्करजी ने कहा कि ऐसी बात नहीं है कि आज के समय में धर्म के प्रति लोगों की आस्था घटी है. बल्कि पहले की अपेक्षा धर्म के प्रति लोगों में आस्था में वृद्धि हुई है. लेकिन इस आस्था का घनत्व कम हो गया है. श्रोताओं का भी कथा सुनने के प्रति पहले की अपेक्षा विस्तार हुआ है.
बुद्धिजीवियों में प्रतिभा होती है, जिसके कारण इस समालोचना से कथा से प्रभावित होनेवालों की संख्या में वृद्धि हुई है. आज के समय में धार्मिक बैनरों की संख्या और जगह-जगह यज्ञ करानेवालों की संख्या लगातार बढ़ने के विषय में त्रिदंडी स्वामीजी के शिष्य ने कहा कि अलग-अलग बैनर के नीचे धार्मिक संस्था चलानेवाले तथाकथित बाबाओं से धर्म का कोई लाभ नहीं हो रहा है, बल्कि उनको आर्थिक लाभ मिल रहा है. वैसे यज्ञ करानेवालों को तो पता भी नहीं है कि धर्म क्या है. धर्म को समझने के लिए वेदों का अध्ययन आवश्यक है.
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