प्रजापति कुम्हार माहसंघ ने धरना दिया

Published at :07 Sep 2016 8:07 AM (IST)
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प्रजापति कुम्हार माहसंघ ने धरना दिया

माटी कला बोर्ड का गठन कर कुम्हारी कला को पहचान दें : योगेंद्र प्रजापति गढ़वा : झारखंड प्रजापति कुम्हार महासंघ की जिला कमेटी की ओर से मंगलवार को गढ़वा समाहरणालय परिसर में धरना दिया. साथ ही शहीद नीलांबर नगरभवन से एक जुलूस भी निकाला गया. समाहरणालय पर 14 सूत्री मांगों को लेकर महासंघ की ओर […]

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माटी कला बोर्ड का गठन कर कुम्हारी कला को पहचान दें : योगेंद्र प्रजापति
गढ़वा : झारखंड प्रजापति कुम्हार महासंघ की जिला कमेटी की ओर से मंगलवार को गढ़वा समाहरणालय परिसर में धरना दिया. साथ ही शहीद नीलांबर नगरभवन से एक जुलूस भी निकाला गया.
समाहरणालय पर 14 सूत्री मांगों को लेकर महासंघ की ओर से दिये गये धरना की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष योगेंद्र प्रजापति ने की़ इस अवसर पर बोलते हुए श्री प्रजापति ने कहा कि झारखंड राज्य सहित देशस्तर पर माटी कला बोर्ड की स्थापना को लेकर वे लगातार आंदोलन कर रहे है़ं इस बोर्ड के गठन हो जाने से कुम्हारों की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी़ साथ ही उनकी स्थिति में भी सुधार होगा़ साल 2008 में उनके राष्ट्र स्तर के सम्मेलन में भाजपा नेता राजनाथ सिंह ने आश्वासन दिया था कि वे सत्ता में आने के बाद माटी कला बोर्ड का गठन करा देंगे.
अभी श्री सिंह गृह मंत्री हैं, लेकिन इस पर उन्होंने कोई पहल नहीं की है़ इसी तरह रांची के हरमू में आयोजित सम्मेलन में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन व 2011 में जमशेदपुर में आयोजित सम्मेलन में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी बोर्ड के गठन के प्रति आश्वासन दिया था, लेकिन सभी नेताओं ने उन्हें ठगने का काम किया है़ श्री प्रजापित ने कहा कि गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित देश के छह राज्यों में बोर्ड का गठन किया गया है़ उसी की तर्ज पर झारखंड में भी कुम्हार प्रजापतियों के कला को पहचान देने की आवश्यकता है़
सीएम को मांगपत्र भेजा
धरना के पश्चात महासंघ की ओर से 14 सूत्री मांगपत्र भेजा गया. इसमें उपरोक्त के अलावा कुम्हारों को अजजा में शामिल करने, कुम्हारी शिल्प कला उद्योग का गठन करने, खादी व ग्रामोद्योग निगम में कुम्हारों को प्रतिनिधित्व देने, शिल्प महाविद्यालय की स्थापना करने, प्रत्येक जिला में कुम्हारी कला प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र का गठन करने, भूमिहीन कुम्हारों को वासगीत का परचा देने, लुप्त हो रही कुम्हारी पेशा को अनुदान देकर सुदृढ़ करने आदि शामिल है़
संचालन रामचंद्र प्रजापति ने किया़ इस अवसर पर रामसुंदर प्रजापति, कन्हैया प्रजापति, सेवक प्रजापति, युगल प्रजापति, विष्णु प्रजापति, रामवृक्ष प्रजापति, कोमल प्रजापति, उतीमदेव प्रजापति सहित अन्य लोग उपस्थित थे़
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