डूब सकती हैं 50 गांवों की जमीन

Published at :24 Aug 2016 12:04 AM (IST)
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डूब सकती हैं 50 गांवों की जमीन

विनोद पाठक गढ़वा : गढ़वा जिले के सोन व कोयल नदी की बाढ़ से हर साल बड़े पैमाने पर हो रहे के भूमि के कटाव के कारण करीब 50 गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. इन नदियों के तट पर अवस्थित गांव की भूमि हर साल ये नदियां अपने में समाहित करती जा […]

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विनोद पाठक
गढ़वा : गढ़वा जिले के सोन व कोयल नदी की बाढ़ से हर साल बड़े पैमाने पर हो रहे के भूमि के कटाव के कारण करीब 50 गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. इन नदियों के तट पर अवस्थित गांव की भूमि हर साल ये नदियां अपने में समाहित करती जा रही हैं. कोई भी ऐसा साल नहीं गुजरा, जब इन नदियों के तट पर बसे ग्रामीणों की भूमि नदी में कट कर न बहा ली गयी हो. पहले नदियां अपने तटवर्ती भूमि के ऊपरी हिस्सों को बहा कर वहां ढाब बनाती हैं.
इसके बाद वह उक्त भूमि के भाग को अपनी धारा में शामिल कर बहा ले जाते हैं. जिले के सोन व कोयल नदी के तट पर बसे गांवों की अब तक कितनी जमीन नदी में समाहित हो चुकी हैं, इसका अंदाजा लगा पाना कठिन है. लेकिन इतना कहा जा सकता है कि सोन और कोयल नदी मिल कर अपने 60 किमी(दोनों नदियों की लंबाई करीब 30-30 किमी) की दूरी में हर साल सैकड़ों एकड़ की जमीन का कटाव हो रहा है.
उल्लेखनीय है कि इन दोनों ही नदियों का पाट(चौड़ाई) पहले ही काफी अधिक है. हर साल भूमि का कटाव होते जाने की वजह से यह पाट और अधिक बढ़ता जा रहा है. गौरतलब है कि सामान्य दिनों में ये नदियां इतने चौड़े पाट में नहीं बहती हैं. ये अपनी चौड़ाई की करीब एक चौथाई भाग में सिमटी रहती है. इसलिए इन नदियों की धारा को बहने के लिए जितनी चौड़ाई की जरूरत है, उससे करीब तीन गुणा-चार गुणा अधिक हिस्से में वे अपना अस्तित्व फैला कर रखी हुई हैं और सुरसा की भांति यह पाट लगातार बढ़ता जा रहा है.
इसका खामियाजा नदी के तट पर बसे गांव और वहां के लोगों को उठाना पड़ रहा है. नदी के लगातार कटाव की वजह से कई छोटे किसान तो भूमिहीन होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं, वहीं कई समृद्ध किसानों की हालत दयनीय स्थिति में पहुंच गयी है.
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