200 लोगों पर एक चापानल

Published at :10 Apr 2016 9:29 AM (IST)
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200 लोगों पर एक चापानल

बड़गड़ प्रखंड में जलस्त्रोत नीचे चले जाने के कारण पेयजल संकट गहरा गया है. तीन दशक पहले बनी जलमीनार सिर्फ दिखावे की वस्तु बन कर रह गयी है. बड़गड़ (गढ़वा) : बड़गड़ प्रखंड क्षेत्र के लोग इस समय पेयजल की भारी समस्या से जूझ रहे हैं. सभी जलस्त्रोतों का जलस्तर नीचे चले जाने के कारण […]

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बड़गड़ प्रखंड में जलस्त्रोत नीचे चले जाने के कारण पेयजल संकट गहरा गया है. तीन दशक पहले बनी जलमीनार सिर्फ दिखावे की वस्तु बन कर रह गयी है.
बड़गड़ (गढ़वा) : बड़गड़ प्रखंड क्षेत्र के लोग इस समय पेयजल की भारी समस्या से जूझ रहे हैं. सभी जलस्त्रोतों का जलस्तर नीचे चले जाने के कारण पंचायत में पीने के पानी के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है. प्रखंड मुख्यालय में करीब तीन दशक पहले बना जलमीनार बनायी गयी थी. इस जलमीनार से पेयजलापूर्ति करने के लिए टेंगारी, गोठानी, बड़गड़ आदि में पाइप लाइन बिछायी गयी है.
इस जलमीनार से हर वर्ष फरवरी महीने से कुलवंती नदी के पानी का आपूर्ति आसपास के गांवों में की जाती थी. लेकिन इस वर्ष पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है. लेकिन इस समय इस जलमीनार से पेयजलापूर्ति नहीं हो रही है. इसके कारण इस इलाके के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं. इस संबंध में पेयजल व स्वच्छता विभाग के सहायक अभियंता बृजकुमार उपाध्याय से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि डीजल के लिए इस वर्ष आवंटन नहीं होने के कारण जलापूर्ति नहीं की जा रही है. राशि उपलब्ध होते ही जलापूर्ति चालू कर दी जायेगी.
इधर इस क्षेत्र के कुएं का जलस्तर नीचे चले जाने से सभी कुआं सूख गये हैं. वहीं चापानल या तो खराब है अथवा जलस्तर नीचे जाने के कारण पानी देना बंद कर दिया है. गिने-चुने चापानलों पर जिसका जलस्त्रोत बचा हुआ है, वहां पानी की भारी समस्या उत्पन्न हो गयी है. टेहरी पंचायत के आदिम जनजाति बहुल खीराखाड़गांव के लोगों ने कहा कि उनके गांव
में तीन चापानलों में से दो चापानल मरम्मत के अभाव में बेकार पड़ा हुआ है. इसके कारण 200 आबादीवाला यह गांव मात्र एक चापाकल के भरोसे रह गया है. यही स्थिति परसवार पंचायत की भी है.
पंचायत के मुटकी गांव की भी है. मुटकी निवासी शंकर यादव ने बताया कि उनके गांव के चापानल का जलस्तर नीचे जाने के कारण मात्र एक-दो बाल्टी पानी मुश्किल से दे रहा है. उनके गांव की कुलवंती नदी पूरी तरह से सूख गयी है. इसके कारण मवेशियों को पानी पिलाने की समस्या उत्पन्न हो गयी है.
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