मशीन पुरानी, प्रयोग की भी जानकारी नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Dec 2015 6:23 AM (IST)
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गढ़वा : कल्याण विभाग की ओर से शत-प्रतिशत अनुदान पर बांटे गये कृषि यंत्र को लेकर अनियमितता का मामला सामने आया है. घटिया किस्म के यंत्र का वितरण चेन्नई की एक कंपनी ने किया है. अनियमितता का मामला सामने आने के बाद जिला कल्याण पदाधिकारी जनार्दन राम ने कंपनी के भुगतान पर रोक लगाने की […]
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गढ़वा : कल्याण विभाग की ओर से शत-प्रतिशत अनुदान पर बांटे गये कृषि यंत्र को लेकर अनियमितता का मामला सामने आया है. घटिया किस्म के यंत्र का वितरण चेन्नई की एक कंपनी ने किया है. अनियमितता का मामला सामने आने के बाद जिला कल्याण पदाधिकारी जनार्दन राम ने कंपनी के भुगतान पर रोक लगाने की अनुशंसा सरकार से की है.
झारखंड राज्य स्थापना दिवस के मौके पर लगाये गये विकास मेला सह प्रदर्शनी में इसका वितरण करना था. वितरित किये गये कृषि यंत्रों में धान रोपने की मशीन, दवा छिड़कने की मशीन आदि शामिल हैं. वितरित किये गये कृषि यंत्र काफी पुराने हैं तथा इसके लाभुकों के चयन में भी अनियमितता की बात सामने आ रही है. कृषि यंत्र का लाभ सिर्फ आदिवासियों को देना था. लाभुकों के चयन में भी मनमानी करने का आरोप है. इसके चयन के लिए कोई नियमवाली भी नहीं बनायी गयी थी. बीडीओ के माध्यम से स्वविवेक के आधार पर लाभुकों का चयन किया गया है. वैसे तो इसे 15 नवंबर को वितरित करना था.
लेकिन सभी लाभुकों के नहीं पहुंचने की वजह से इसका वितरण बाद में भी किया जा रहा है. पुरानी मशीन मिलने के बाद से लाभुक किसान भड़क गये हैं. सरकारी शर्तों के मुताबिक कंपनी को नयी मशीन को न सिर्फ लाभुकों तक पहुंचाना था, बल्कि उन्हें इसके प्रयोग की विधि भी घर-घर जाकर बतानी थी. लेकिन स्थानीय गोविंद उवि के मैदान से इसका वितरण करने के बाद यहां पहुंचे कंपनी के पदाधिकारी वापस चले गये.
इधर भाजपा नेता बजेंद्र पाठक एवं राजद के उमाकांत यादव ने आरोप लगाया कि मशीनें काफी जर्जर व पुरानी हैं. साथ ही यहां के किसान इस नयी व आधुनिक मशीन के प्रयोग से अनभिज्ञ हैं. ऐसे में जब तक उन्हें मशीन चलाने का पूरा प्रशिक्षण खेतों में जाकर नहीं दिया जाता है, तब तक यह किसानों के यहां बेकार पड़ी रहेगी.
लाभुकों से जानकारी मिली है : जनार्दन राम
इस संबंध में जिला कल्याण पदाधिकारी जनार्दन राम ने बताया कि लाभुकों को पुरानी मशीन देने एवं उन्हें प्रशिक्षण नहीं देने की जानकारी उन्हें लिखित रूप से लाभुकों की ओर से मिली है.
इस पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने कंपनी को भुगतान नहीं करने की अनुशंसा राज्य सरकार को कर दी है. उन्होंने कहा कि उनका अधिकार क्षेत्र सिर्फ भुगतान करने की अनुशंसा तक ही सीमित है. इसलिए उन्होंने अपनी शक्ति का उपयोग कर इससे संबंधित पत्र सरकार को भेज दिया है. उन्होंने कहा कि जब तक कंपनी के लोग उन्हें किसानों से लिखित रूप से यह लाकर नहीं देंगे कि वे इससे संंतुष्ट हैं, भुगतान से रोक नहीं हटेगी.
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