पांच वर्ष बाद भी नहीं बन पाया एनएच 75

Published at :21 Aug 2015 6:50 AM (IST)
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पांच वर्ष बाद भी नहीं बन पाया एनएच 75

गढ़वा : विगत पांच वर्षों से गढ़वा-पलामू एनएच-75 सड़क निर्माण कार्य में लगी महाराष्ट्र की कंपनी पाटिल कंस्ट्रक्शन सरकार के आदेश की अवहेलना कर ही है. बीते पांच वर्षों में सूबे के तीन-तीन मुख्यमंत्रियों के निर्देशों की अवहेलना कर रही है. विदित हो कि पलामू जिले के पड़वा मोड़ से नगरऊंटारी यूपी की सीमा तक […]

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गढ़वा : विगत पांच वर्षों से गढ़वा-पलामू एनएच-75 सड़क निर्माण कार्य में लगी महाराष्ट्र की कंपनी पाटिल कंस्ट्रक्शन सरकार के आदेश की अवहेलना कर ही है. बीते पांच वर्षों में सूबे के तीन-तीन मुख्यमंत्रियों के निर्देशों की अवहेलना कर रही है.
विदित हो कि पलामू जिले के पड़वा मोड़ से नगरऊंटारी यूपी की सीमा तक 78 किमी सड़क निर्माण का कार्य लगभग पांच वर्ष पूर्व एनएच-75 सड़क निर्माण के लिए पाटिल कंस्ट्रक्शन को 100 करोड़ रूपये का कार्य सौंपा गया था. काम मिलने के बाद पाटिल कंस्ट्रक्शन ने आनन-फानन में पड़वा मोड़ से मुड़ीसेमर तक 150 पुल-पुलिया को काट कर छोड़ दिया. काटे गये पुल-पुलिया में गिर कर सैकड़ों लोगों की मौत हुई और 500 से अधिक लोग घायल हो गये. इस दौरान हेमंत सोरेन व अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री बने. लेकिन सड़क की हालात नहीं सुधरी. एनएच-75 के निर्माण की मांग को लेकर दर्जनों बार सड़क जाम कर आंदोलन किया गया. लेकिन हालात जस के तस रहे.
विधानसभा चुनाव के बाद गढ़वा के नये उपायुक्त डॉ मनीष रंजन के आने के बाद काम में तेजी आयी. डॉ रंजन ने प्रतिदिन संवेदक को सड़क निर्माण से संबंधित रिपोर्ट सौंपने को कहा. इसका असर भी हुआ और गढ़वा से मेराल तक सड़क का निर्माण भी हुआ. लेकिन इसी बीच रघुवर दास की सरकार बनी और उपायुक्त का तबादला हो गया. स्थिति फिर वहीं हो गयी. गढ़वा से रेहला तक नौ किमी सड़क इतनी जर्जर हो चुकी है कि आये दिन इस मार्ग में दुर्घटना आम बात हो गयी हैं. इस मार्ग में अभी भी काटे गये पुल-पुलिया का निर्माण अधूरा है. सड़क निर्माण को लेकर सड़क के किनारे दर्जनों पेड़ों को भी काट दिया गया, लेकिन सड़क नहीं बना. यही हाल गढ़वा से मुड़ीसेमर मार्ग में भी है. बाना गांव से रमना तक सड़क काफी जर्जर हो चुकी है. बारिश होने के बाद इस पर वाहनों का परिचालन में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.
राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने पर लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब शीघ्र ही इस सड़क का निर्माण हो जायेगा, लेकिन संवेदक पर कोई असर नहीं पड़ा और न ही सरकार ने इस मामले में कड़ा रूख अख्तियार किया. दोनों जिला के लोगों की अब नियती बन गयी है जर्जर सड़कों पर चलना.
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