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280 के बदले 164 ग्राम ही उपलब्ध है प्रति व्यक्ति दूध

Updated at : 01 Oct 2019 1:27 AM (IST)
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280 के बदले 164 ग्राम ही उपलब्ध है प्रति व्यक्ति दूध

गढ़वा : इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 280 ग्राम दूध पीना चाहिए. लेकिन गढ़वा जिले के प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 164 ग्राम दूध ही उपलब्ध हो रहा है. दुग्ध उत्पादन के मामले में गढ़वा जिला का स्थान में छठे पायदान पर है. गढ़वा जिले में दूध […]

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गढ़वा : इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 280 ग्राम दूध पीना चाहिए. लेकिन गढ़वा जिले के प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 164 ग्राम दूध ही उपलब्ध हो रहा है. दुग्ध उत्पादन के मामले में गढ़वा जिला का स्थान में छठे पायदान पर है.

गढ़वा जिले में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम किये जा रहे है़ं इसके माध्यम से देशी गाय को विदेशी नस्ल में तब्दील कर दूध बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. गढ़वा जिले में दूध देनेवाले पशुओं में यहां सबसे ज्यादा गायों की संख्या है़ पशुधन गणना 2012-13 के आंकड़े के अनुसार यहां गोवंशीय पशुओं की संख्या 392257 है.

जबकि भैंसों की संख्या 60397, बकरियां की संख्या 214780 व भेड़ों की संख्या 31643 है. झारखंड राज्य मिल्क फेडेरेशन के आंकड़े के अनुसार अभी गढ़वा जिले के 72 गांवों से प्रतिदिन औसतन 5000 लीटर दूध क्रय किये जा रहे है़. इसके अलावा भी गढ़वा जिले में करीब एक लाख लीटर दूध और उपलब्ध है़, जिसे लोग निजी रूप में उपयोग करते है़.
दूध बेचने से महीने में 45 लाख अर्जित कर रहे हैं ग्रामीण : झारखंड राज्य मिल्क फेडरेशन की ओर से प्रत्येक माह 1.50 लाख लीटर दूध ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे है़ं यहां से उन्हें दूध में फैट की मात्रा के अनुसार औसतन 30 रुपये प्रति लीटर की हिसाब से राशि का भुगतान किया जा रहा है़ इस तरह से गढ़वा जिले के पशुपालकों को 1.50 लाख रुपये प्रतिदिन यानि 45 लाख रुपये महीना का भुगतान किया जा रहाहै. गढ़वा जिले में तीन बल्क मिल्क कूलर की स्थापना की गयीहै इसमें मड़वनिया व लातदाग केंद्र की क्षमता दो हजार लीटर तथा मझिआंव की क्षमता तीन लाख लीटर की ह जिले के 72 गांवों से दूध का कलेक्शन करने के लिए 19 स्थानों पर मिल्क पोरिंग प्लांट लगाये गये है़ं यहां दूध में फैट की मात्रा जांच की जाती है और उस हिसाब से दूध का दर तय किया जाता है़ सभी दूध को कलेक्शन करने के बाद उसे लातेहार दुग्ध शीतक केंद्र में भेजा जाता है़ वहां से पैकिंग कर उसे फिर गढ़वा जिले के लोगों को उपलब्ध कराया जाता है़ दूध कलेक्शन की शुरुआत गढ़वा जिले में 17 फरवरी 2017 से की जा रही है.
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