खेती में जुटे जिले के किसान

Updated at : 03 Jul 2019 1:21 AM (IST)
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खेती में जुटे जिले के किसान

गढ़वा : पूरे जून महीने तक वर्षा के लिए तरस रहे गढ़वा जिले के किसानों को जुलाई महीना के चढ़ते मॉनसून के पहुंचने की आहट ने एक बार पुन: खेती की उम्मीद को जगाने का काम किया है. सोमवार को जुलाई महीने के शुरू होने के साथ ही आकाश में बादल के छाने व छिटपुट […]

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गढ़वा : पूरे जून महीने तक वर्षा के लिए तरस रहे गढ़वा जिले के किसानों को जुलाई महीना के चढ़ते मॉनसून के पहुंचने की आहट ने एक बार पुन: खेती की उम्मीद को जगाने का काम किया है. सोमवार को जुलाई महीने के शुरू होने के साथ ही आकाश में बादल के छाने व छिटपुट बारिश के साथ मॉनसून का आगमन हो चुका है.

इससे निराश किसानों की आंखों में फिर से चमक दिखने लगी है. ग्रामीण कृषि मौसम सेवा गढ़वा की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई के शुरुआती पूरे सप्ताह तक गढ़वा जिले में लगातार मॉनसून के बादल छाये रहेंगे और छिटपुट बारिश भी होती रहेगी. वैसे सात जुलाई को भारी बारिश होने के संकेत दिये गये हैं.

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची के कृषि मौसम व पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि बुधवार से गढ़वा जिला और आसपास के क्षेत्रों में और अच्छी बारिश होगी. रिपोर्ट के मुताबिक तीन जुलाई को 14 मिमी बारिश, चार जुलाई को दो मिमी, पांच जुलाई को तीन मिमी तथा छह जुलाई को 13 मिमी बारिश होने की संभावना है. जबकि सात जुलाई को जिले में 60 मिमी तक वर्षा हो सकती है. इस तरह जिले में लगातार बादल छाये रहेंगे और न्यूनतम तापमान भी 32 डिग्री के आसपास बना रहेगा. आद्रा नक्षत्र की इस बारिश से भदई व खरीफ दोनों फसलों के संभलने की उम्मीद बनी है.

विदित हो कि जून महीने में औसत से काफी कम बारिश होने की वजह से किसानों में खेती के प्रति निराशा दिखने लगी थी. यद्यपि किसानों ने चढ़ते आद्रा की बारिश से उत्साहित होकर जुताई शुरू कर दी थी. कई जगह मकई और दलहन सहित धान के बिचड़े भी खेतों में बो दिये गये थे. लेकिन इसके बाद लगातार कड़ी धूप निकलने की वजह से किसान परेशान हो गये थे. गौरतलब है कि अब किसानों को भदई व खरीफ दोनों के ही बीज के लिए बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है. बाजार से बीज खरीदने के कारण उनकी एक अच्छी पूंजी लग जाती है. इसलिए जब खेतों में बीज को बोने के बाद पर्याप्त बारिश के अभाव में उनका बीज खेतों में ही सूख जाता है, तो उनकी कमर टूट जाती है. क्योंकि आगे मौसम अनुकूल हो जाने के बावजूद फिर से बीज को खरीद कर नये सिरे से बिचड़ा लगाने की उनकी हिम्मत टूट जाती है.

वैसे अभी तक जिले के अधिकांश क्षेत्रों में किसानों ने आद्रा नक्षत्र की पहली बारिश में खेतों में नमी आने के बाद सिर्फ खेतों की जुताई कर रखी थी और वे आकाश की ओर टकटकी लगाकर मॉनसून की स्थिति का जायजा ले रहे थे. अब एक जुलाई से मौसम के बदले मिजाज से किसानों को इस साल खेती करने का विश्वास जमना शुरू हुआ है. यद्यपि गढ़वा जिले में विलंब से मॉनसून का आना कोई नयी बात नहीं है.

यहां अमूमन जुलाई से अगस्त महीने में ही बारिश होने का रिकॉर्ड है. बावजूद आषाढ़ चढ़ते किसान खेती के मुहूर्त को देखते हुए जून में कम से कम न्यूनतम बारिश की उम्मीद लगाये रहते हैं. इसके बावजूद अनुमान है कि विलंब से ही सही, किंतु जुलाई के प्रथम सप्ताह की बारिश के बाद पूरे जिले में चारों ओर खेतों में रौनक देखने को मिल सकती है.

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