लापरवाही: नो इंट्री हटते ही मुख्य पथ पार करना हो जाता है मुश्किल, एक किमी चलने में लगता है एक घंटा

Updated at : 24 Nov 2017 1:34 PM (IST)
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लापरवाही: नो इंट्री हटते ही मुख्य पथ पार करना हो जाता है मुश्किल, एक किमी चलने में लगता है एक घंटा

गढ़वा: गढ़वा मेन रोड पर अतिक्रमण और जाम की समस्या आये दिन लोगों को परेशान कर रही है. विदित हो कि गढ़वा मेन रोड से ही एनएच गुजरा है. इसके कारण इस मुख्य पथ पर अंतरराज्यीय यात्री बसों के अलावा बड़े मालवाहक वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है. इन वाहनों को गढ़वा शहर के […]

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गढ़वा: गढ़वा मेन रोड पर अतिक्रमण और जाम की समस्या आये दिन लोगों को परेशान कर रही है. विदित हो कि गढ़वा मेन रोड से ही एनएच गुजरा है. इसके कारण इस मुख्य पथ पर अंतरराज्यीय यात्री बसों के अलावा बड़े मालवाहक वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है. इन वाहनों को गढ़वा शहर के बीच से गुजरने के कारण शहर में अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है.

दिनभर रहनेवाले जाम से छुटकारा दिलाने के लिए प्रशासन ने नो इंट्री की व्यवस्था की है. इस क्रम में विभिन्न मार्गों के लिए नो इंट्री खुलने का अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है. लेकिन नो इंट्री के हटते ही गढ़वा बस स्टैंड से रंका मोड़ तक पार करना टेढ़ी खीर बन जाता है. इस एक किलोमीटर की दूर पार करने में करीब एक घंटा तक लग जाता है. यह स्थिति सुबह 11 बजे से अपराह्न करीब 3 बजे तक रहती है.

स्कूल बसें व बच्चे फंसते हैं जाम में : नो इंट्री के खुलते ही एक ही साथ दर्जनों भारी मालवाहक वाहनों के शहर में प्रवेश करते ही शहर की अस्त-व्यस्त स्थिति हो जाती है. दिन में नो इंट्री हटने पर अक्सर स्कूल बसें जाम में फंस जाती हैं. इसके कारण स्कूल बसों को गढ़वा मुख्य पथ से गुजरने के दौरान लंबा समय लग जाता है. जो बच्चे पैदल अथवा दोपहिया वाहनों से स्कूल से घर के लिए जाते हैं, उन्हें अक्सर वाहनों की भीड़ की चपेट में आने की आशंका बनी रहती है. साथ ही आम लोगों को भी शहर की मुख्य पथ से गुजरने में समस्या बनी रहती है. विशेषकर मझिआंव मोड़ से रंका मोड़ तक महज एक किमी दूरी पार करने में घंटों का वक्त लग जाता है.
बाइपास की पहल से बनी है आशा
पिछले दिन फोरलेन बनने के साथ गढ़वा शहर के लिए बाइपास बनाने की केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा व बाइपास के लिए किये गये सर्वे के लिए आने वाले कुछ सालों में यहां जाम की समस्या से मुक्ति के आसार जरूर जगे हैं. लेकिन यदि यह योजना धरातल पर उतरती भी है, तो कम से कम इसमें दो साल लगेंगे. इस बीच शहर की आये दिन की परेशानी से छुटकारा दिलाने के लिए मुख्य पथ को अतिक्रमण व सड़क पर की जानेवाली बेतरतीब पार्किंग की समस्या दूर करनी होगी.
सड़क पर ही लगती हैं दुकानें
गढ़वा शहर से होकर ही एनएच 75 के गुजरने के कारण वैसे ही शहर का मुख्य पथ वाहनों की भीड़ से संकरा पड़ जाता है. लेकिन सड़क पर स्थानीय व्यवसायियों द्वारा अतिक्रमण कर लिये जाने के कारण सड़क की चौड़ाई और संकीर्ण हो जाती है. मुख्य पथ के कई व्यवसायी सड़क तक अपनी दुकान का विस्तार कर लगाते हैं. साथ ही उनके दुकान के सामने ग्राहकों के वाहनों की पार्किंग किये जाने के कारण एनएच 75 शहर में बिल्कुल ही सिमटा हुआ दिखने लगता है. इसके कारण दोनों ओर से आनेवाले वाहन अतिक्रमण अथवा गाड़ियों की पार्किंग की वजह से फंस जाते हैं. घंटों लोग परेशान रहते हैं. लेकिन इस बीच कई लोग जहां अपने चारपहिया वाहनों को सड़क किनारे ही बेखौफ होकर लगाकर आराम से अपनी खरीदारी करते हैं और दुकानदार अपने दुकान को आगे तक बढ़ाकर दुकानदारी करते रहते हैं. उनकी गलती की वजह से मुख्य पथ पर जाम की स्थिति बनी रहती है. बावजूद ऐसे लोगों में नागरिकता का बोध(सिविक सेंस) होता नहीं दिखता. यातायात पुलिस सिर्फ रंका मोड़, टंडवा मोड़ और मझिआंव मोड़ पर वाहनों को पार कराने में ही परेशान दिखती है. बीच में मुख्य पथ पर दुकानदारों द्वारा किये गये अतिक्रमण को हटाने व सड़क पर वाहनों की घंटों तक पार्किंग करनेवाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. इसके कारण गढ़वा शहरवासी काफी दिनों से जाम की स्थिति को झेलनी के लिए मजबूर दिखते हैं.
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