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संवेदनहीनता की हद : रामचंद्र के गृह जिले में बीमार महिला उपेक्षा की शिकार, मदद का है इंतजार

Updated at : 05 Sep 2017 1:22 PM (IST)
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संवेदनहीनता की हद : रामचंद्र के गृह जिले में बीमार महिला उपेक्षा की शिकार, मदद का है इंतजार

केतार : कहते हैं कि जिसका कोई नहीं, उसका खुदा होता है. सरकार का दावा है कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचने के लिए वह काम कर रही है. लेकिन, तथाकथित सभ्य और सुसंस्कृत समाज के बीच में एक विक्षिप्त महिला कई दिनों से बेसुध पड़ी है, उसे देखनेवाला कोई नहीं. […]

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केतार : कहते हैं कि जिसका कोई नहीं, उसका खुदा होता है. सरकार का दावा है कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचने के लिए वह काम कर रही है. लेकिन, तथाकथित सभ्य और सुसंस्कृत समाज के बीच में एक विक्षिप्त महिला कई दिनों से बेसुध पड़ी है, उसे देखनेवाला कोई नहीं. उसे अस्पताल ले जानेवाला भी कोई नहीं है.

मामला राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के गृह जिले का है. महिला के हाथ-पैर में लाल चुनरी बांधी है. तन ढकने को पर्याप्त कपड़े तक नहीं हैं. एक साल से यह महिला भवनाथपुर इलाके में देखी जा रही थी. अब वह केतार में बेसुध पड़ी है. सदैव नाचने-गानेवाली यह महिला अब तक किसी तरह अपना जीवन यापन कर रही थी.

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अब उसके पैर में बड़ा जख्म हो गया है. इसकी वजह से वह चल-फिर नहीं पा रही है. जिसे लोगों ने सदा नाचते-गाते देखा था, वह आज बेसुध पड़ी है. महिला जब भी जागती है दर्द से कराह उठती है. वहां से गुजरनेवाले लोग उसे देखते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. लेकिन, किसी को उस पर तरस नहीं आती.

हर आने-जानेवाले शख्स में महिला किसी फरिस्ते को तलाशती है, लेकिन उसकी उम्मीदें मुरझा जाती हैं, जब राहगीर बिना उसकी मदद किये आगे बढ़ जाता है.

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और तो और, प्रशासन को सूचना दिये जाने के बावजूद उसकी किसी ने अब तक कोई मदद नहीं की. गढ़वा जिले में कई बड़े समाजसेवी हैं. स्वास्थ्य मंत्री खुद गढ़वा से हैं, लेकिन इस विक्षिप्त महिला को अस्पताल तक पहुंचाने की किसी ने अब तक जहमत नहीं उठायी.

महिला की स्थिति दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है. लोग बताते हैं कि जल्द उसका इलाज नहीं हुआ, तो उसके साथ कुछ भी अनहोनी हो सकती है.

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विक्षिप्त और बीमार महिला के प्रति लोगों में सहानुभूति तो है, लेकिन किसी में इतनी मानवीयता नहीं बची कि उसे अस्पताल पहुंचा दे, जहां उसका इलाज हो सके. प्रशासन भी संवेदनहीन बना हुआ है, क्योंकि सूचना देने के बाद भी उसने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की.

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