East Singhbhum News : विभूति भूषण की कर्मभूमि का दर्शन किया

घाटशिला के गौरीकुंज में पहुंचे बंगाल के पर्यटक
घाटशिला.
बंगाल के पर्यटक, विभिन्न स्कूलों के शिक्षक व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं रविवार को घाटशिला के दाहीगोड़ा स्थित गौरीकुंज पहुंचे. यहां उन्होंने साहित्य, इतिहास और प्रकृति से जुड़ी इस अनोखी जगह का भ्रमण किया. पर्यटकों ने पूरे परिसर का जायजा लिया. फोटोग्राफी की और विभूतिभूषण बंदोपाध्याय की स्मृतियों से जुड़े स्थानों को नजदीक से देखा. गौरतलब है कि प्रसिद्ध साहित्यकार विभूति भूषण बंदोपाध्याय, जिन्होंने पाथेर पांचाली जैसे विश्वविख्यात उपन्यास की रचना की. घाटशिला में कई वर्षों तक रहे थे. उन्होंने अपने निवास का नाम अपनी पत्नी के नाम पर गौरीकुंज रखा था. यही कारण है कि आज यह स्थान साहित्य प्रेमियों और पर्यटकों दोनों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बना है.विरासत और प्रकृति का अनोखा संगम है गौरीकुंज
गौरीकुंज में प्राकृतिक हरियाली, पुराने मकान की संरचना, दीवारों पर उकेरी गयी सांस्कृतिक छवियां और शांत वातावरण पर्यटकों को बांधे रखता है. बंगाल से आये छात्रों ने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी लेखक के जीवन और उनकी सृजन-भूमि को इतनी नजदीक से देखा. छात्रों ने बताया कि पाथेर पांचाली का अध्ययन करते समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे विभूतिभूषण की रहन-सहन वाली जगह को देख पायेंगे. बंगाल से आये शिक्षकों ने कहा कि घाटशिला का वातावरण बच्चों के लिए बिल्कुल सुरक्षित और शैक्षणिक भ्रमण के लिए उपयुक्त है. यहां साहित्य, इतिहास और प्रकृति तीनों का संगम बच्चों में सीखने की उत्सुकता बढ़ाता है.
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