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East Singhbhum News : रूढ़ीवादी सोच आदिवासियों की प्रगति में बाधक: डॉ सुनीता

आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति, श्रम और सामूहिकता के सहारे अपनी पहचान बनायी है

चाकुलिया. चाकुलिया प्रखंड के अंधरिया में रूंडा संक्रांति पर आयोजित दो दिवसीय आदिवासी मेला का समापन गुरुवार को हुआ. मौके पर मेला की संरक्षक सह मुख्य अतिथि समाजसेवी डॉ सुनीता देवदूत सोरेन ने पारंपरिक नृत्य प्रतियोगिता के विजेता को सम्मानित किया. डॉ सुनीता ने कहा कि आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति, श्रम और सामूहिकता के सहारे अपनी पहचान बनायी है. अब आवश्यकता है कि हमारा समाज शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और संगठन के क्षेत्र में और अधिक सशक्त होकर आगे बढ़े. हमें आत्ममंथन करते हुए अपनी उन आंतरिक विसंगतियों, कुरीतियों और रूढ़ीवादी सोच को त्यागना होगा, जो हमारी प्रगति में बाधक हैं. समय की मांग है कि आदिवासी समाज अंधविश्वास, आपसी विभाजन और निष्क्रियता को छोड़कर वैज्ञानिक सोच, सामाजिक एकता और संवैधानिक अधिकारों की समझ के साथ आगे बढ़े. तभी हम अपने जल, जंगल, जमीन की रक्षा कर सकेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सम्मानजनक, आत्मनिर्भर और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर पायेंगे. कहा कि हम यहां सिर्फ मेला लगाने नहीं आये हैं. आज हम यहां अपनी पहचान, अपनी संस्कृति और अपने अस्तित्व को जिंदा रखने के लिए इकट्ठा हुए हैं.

विकास के नाम पर छीनी जा रही हमारी जमीन : विक्रम कुमार

मौके पर छात्र नेता विक्रम कुमार ने कहा कि आज विकास के नाम पर हमारी जमीन छीनी जा रही है. हमारी संस्कृति को पिछड़ा कहा जा रहा है. मौके पर मुखिया मोहन सोरेन, आयोजक सरकार किस्कू, सोहन सोरेन, धालभूमगढ़ की पूर्व प्रमुख लीला सिंह, मोंटू किस्कू, बाघराय किस्कू, दिखुराम हेम्ब्रम उपस्थित थे.

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