East Singhbhum News : पर्यटकों को पसंद आ रही घाटशिला की प्रकृति

सुवर्णरेखा नदी के बीच काचीन दोहो पहाड़, अंग्रेजी शासन काल की कचहरी, राजबाड़ी व बंद टनल ऐतिहासिक
घाटशिला.
घाटशिला अपने मनमोहक प्राकृतिक सौंदर्य, स्वर्णरेखा नदी के किनारे बसे होने, घने जंगलों, झरनों और हरियाली के कारण पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है. यह झारखंड का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है. यहां प्रकृति की खूबसूरती और शांति का अनुभव मिलता है, खासकर कोलकाता के पास होने के कारण यह एक लोकप्रिय स्थान बन गया है. घाटशिला के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है. सुवर्णरेखा नदी के तट पर बसा यह ऐतिहासिक शहर हर वर्ष पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों से लगभग 35 से 40 हजार पर्यटकों का स्वागत करता है. पर्यटक यहां कई दिनों तक ठहर कर प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक स्थल और संस्कृति का आनंद लेते हैं. पश्चिम बंगाल से पहुंचे एक दंपती ने बताया कि वे घाटशिला के चित्रकूट पहाड़, सुवर्णरेखा नदी के बीच स्थित काचीन दोहो पहाड़, अंग्रेजी शासनकाल के राजा की कचहरी, पुराने अनुमंडल कार्यालय और प्राचीन शिव मंदिर का दर्शन करने आये हैं. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खूबसूरती और शांति भरा वातावरण घाटशिला को खास बनाता है. वे रंकिणी मंदिर भी पहुंचे. उन्होंने अत्यंत पवित्र और मन को शांति देने वाला स्थल बताया. पर्यटकों का कहना है कि सुवर्णरेखा नदी के बीचों-बीच स्थित काचीन दोहो का पत्थर दूर से ही दिखाई देता है. पर वहां पहुंचना संभव नहीं हो पाता.काचीन दोहा की राजबाड़ी देखना नहीं भूलते पर्यटक
पर्यटक राजस्टेट स्थित राजबाड़ी क्षेत्र से ही काचीन दोहो का दर्शन कर संतोष कर लेते हैं. टेंपो चालकों ने बताया कि पश्चिम बंगाल से आने वाले कई पर्यटक पहले से ही घाटशिला की जगहों के बारे में पूरी जानकारी रखते हैं. चालक केवल उन्हें मार्गदर्शन और सुविधा उपलब्ध कराते हैं. इधर, घाटशिला की ऐतिहासिक धरोहरों की हालत चिंताजनक है. अंग्रेजी शासनकाल की राजवाड़ी कचहरी और पुराना अनुमंडल कार्यालय आज जंगल-झाड़ी में तब्दील हो चुके हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि पूर्व में एसडीओ एस सिद्धार्थ के कार्यकाल में कचहरी परिसर स्थित भूमिगत मार्ग (अंडरग्राउंड टनल) को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था.
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