ओलचिकी लिपि को शत-प्रतिशत घर-घर पहुंचाने के लिए मिलकर काम करना होगा : सुभाष चंद्र मांडी

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ओलचिकी लिपि को शत-प्रतिशत घर-घर पहुंचाने के लिए मिलकर काम करना होगा : सुभाष चंद्र मांडी

आदिवासी सोशियो एजुकेशनल एंड कल्चरल एसोसिएशन ने ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष मिशन के तहत संताली भाषा को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीति तैयार की है।

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वरीय संवाददाता, जमशेदपुर: आदिवासी सोशियो एजुकेशनल एंड कल्चरल एसोसिएशन (आसेका) झारखंड की एक बैठक शुक्रवार को अध्यक्ष सुभाष चंद्र मांडी की अध्यक्षता में घाटशिला पावड़ा कॉलोनी में हुई. इस बैठक में ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष (1925-2025) मिशन पर चर्चा की गयी. मौके पर आसेका के अध्यक्ष सुभाष चंद्र मांडी ने कहा कि ओलचिकी शताब्दी वर्ष मिशन के तहत संताल समाज के लोगों को शत-प्रतिशत ओलचिकी लिपि में लिखना-पढ़ना सिखाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सुदूर गांव-देहात में आदिवासी संताल समाज के लोग अपनी मातृभाषा की लिपि ओलचिकी में लिखना-पढ़ना नहीं लिख पाये हैं. यह अभियान तब तक पूर्ण नहीं हो सकेगा, जब तक आसेका समेत अन्य सामाजिक संगठन व स्वशासन व्यवस्था के प्रमुख अपनी जवाबदेही को नहीं समझ पायेंगे. आसेका के महासचिव शंकर हेंब्रम ने कहा कि आसेका अपना काम निरंतर जारी रखेगा. ओलचिकी के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू के बताये व दिखाये राह पर चलते हुए लोगों को लिपि सीखने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करता रहेगा. उन्होंने कहा कि संताली भाषा की वर्तमान स्थिति व भविष्य विषय पर चर्चा करने के लिए 19 जुलाई को घाटशिला स्थित धाड़ दिशोम माझी परगना महाल में एक बैठक होगी. इस बैठक में आसेका के सुभाष चंद्र मांडी, शंकर सोरेन, सालखु मुर्मू, कान्हाई लाल हेंब्रम, कृष्ण चंद्र हेंब्रम, बोदेन चंद्र हांसदा आदि उपस्थित थे.


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