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East Singhbhum News : पन्ना के अवैध खदानों को किया सील, सर्वे के बाद भी नीलामी नहीं

Updated at : 16 Oct 2025 11:26 PM (IST)
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East Singhbhum News : पन्ना के अवैध खदानों को किया सील, सर्वे के बाद भी नीलामी नहीं

गुड़ाबांदा : अवैध खनन की सूचना पर खनन और वन विभाग की टीम पहुंची

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गुड़ाबांदा. पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा प्रखंड में बेशकीमती पन्ना, नीलम व माइका (अभ्रक) खदान का पता चले 12 साल बीत गये, अभी तक सरकार ने कुछ पहल नहीं की. इसका फायदा माफिया उठा रहे थे. गुरुवार को अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए क्षेत्र के बारुणमुठी, ठुरकुगोड़ा, बाउटिया, चिड़िया पहाड़ में खनिज संपदा पन्ना खदान को जेसीबी मशीन से किए गये गड्ढे में मिट्टी भर सील कर दिया गया. मौके पर डीडीएम कोल्हान प्रमंडल ज्योति सतपति, वन क्षेत्र पदाधिकारी सुनाराम सबर, थाना प्रभारी सुमित कुमार अन्य अधिकारी मौजूद थे.

सर्वे में पता चला था कि 38 वर्ग किमी में पन्ना व नीलम के भंडार

जानकारी मुताबिक 2020-21 और 2022-23 में भूतत्व विभाग ने सर्वे किया. इसकी रिपोर्ट राज्य व केंद्र सरकार को भेजी गयी. पर दुर्भाग्य है कि खदानों की नीलामी अभी तक नहीं हो सकी. इसका कारण भी नहीं बताया गया. इधर प्रशासन का दावा है कि पन्ना खदानें सील हैं, पर जमीनी हकीकत कुछ और है. आज भी चोरी-छिपे खनन जारी है. भूतत्व विभाग के सर्वे में पता चला था कि 38 वर्ग किमी में पन्ना व नीलम के भंडार हैं. कोलकाता जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की प्रयोगशाला में जांच से पता चला था कि उच्च गुणवत्ता वाला पन्ना है. इस संदर्भ में केंद्र और राज्य सरकार को पहल की जरूरत है.

प्रखंड के अधिकांश क्षेत्र पहाड़ों से घिरा

इधर प्रखंड के अधिकांश क्षेत्र पहाड़ों से घिरा है. पहाड़ों के नीचे कीमती खनिज संपदा हैं. इसके बावजूद करीब 60 हजार की आबादी फटेहाल जिंदगी जी रही है. बारुणमुठी, ठुरकुगोड़ा, बाउटिया, चिड़ियापहाड़ में खनिज संपदा है. इन गांवों तक जाने के लिए सड़कें नहीं हैं. लोग पगडंडी से आना जाना करते हैं. बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवा का गंभीर संकट है. पन्ना के अवैध खनन के दौरान मिट्टी धंसने से चार लोगों की अब तक जानें जा चुकी हैं. 2012 में झपाल मुर्मू, रवि मुर्मू व बद्रीनाथ मुर्मू और 2023 में झाबू मुंडा की मौत हो गयी थी. वे मजदूरी करते थे. फिर भी सरकार ओर विभाग की आंख नहीं खुली. गुड़ाबांदा के लोग आज भी लकड़ी, साल पत्ता, केंदू पत्ता और पत्थर के भरोसे जिंदगी जी रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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