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East Singhbhum News : नक्सलमुक्त होने के 10 साल बाद भी विकास की बाट जोह रहा गुड़ाबांदा

Updated at : 30 Nov 2025 11:58 PM (IST)
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East Singhbhum News : नक्सलमुक्त होने के 10 साल बाद भी विकास की बाट जोह रहा गुड़ाबांदा

अस्पताल है पर डॉक्टर नहीं, सड़कें जर्जर, आंगनबाड़ी छह किमी दूर

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गुड़ाबांदा.

गुड़ाबांदा प्रखंड की आठ पंचायत नक्सलमुक्त होने के बाद भी विकास से वंचित हैं. नक्सलियों के सरेंडर किये 10 साल से अधिक हो गये, पर विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ. प्रखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नूतनडीह, बनबेड़ा और जियान स्कूल टोला में सड़क व पुल तक नहीं बना है. बेहतर अस्पताल तक नहीं है. यहां के ग्रामीण दवाई और पढ़ाई से वंचित हैं. राजस्व गांव जियान के बनबेड़ा टोला के पूर्व नक्सली कान्हू मुंडा (अभी जेल)में है. इसी गांव के पूर्व नक्सली रहे शंकर मुंडा, जितेन मुंडा, चुनू मुंडा और भगलू सिंह मुंडा अभी जेल से बाहर हैं.

सभी ने कहा कि सरकार ने सपने दिखा कर सरेंडर कराया था. पर दस साल बाद भी गांवों की स्थिति जस की तस है. सरकार ने गुड़ाबांदा का विकास का वादा किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. वर्तमान में इन गांवों तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क तक नहीं है. जर्जर सड़क से लोग आना-जाना करते हैं. काशियाबेड़ा में उपस्वास्थ्य केंद्र बना है, पर आज तक डॉक्टर नहीं बैठते हैं. गांव के अधिकतर परिवार सरकारी आवास से वंचित हैं. ग्रामीणों को पीएम और अबुआ आवास का लाभ नहीं मिला है. यहां के बच्चे छह किमी दूर आंगनबाड़ी जाते हैं. स्वास्थ्य सेवा बड़ी समस्या है. यहां के मरीज बंगाल या ओडिशा इलाज के लिए जाते हैं.

122 बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र दो शिक्षक

इस गांव में एक स्कूल है. जहां एक से आठवीं तक पढ़ाई होती है. स्कूल में पांच क्लास रूम हैं. 122 बच्चों को दो शिक्षक पढ़ाते हैं. अधिकतर गांव की सड़कें बदहाल हैं. गुड़ाबांदा की चार पंचायत घाटशिला, तो चार पंचायत बहरागोड़ा प्रखंड के अंतर्गत आती है. एक प्रखंड में दो-दो विधानसभा क्षेत्र हैं. दो-दो विधायक हैं. पर विकास के मामले में गुड़ाबांदा कल जैसा था, आज भी वैसा ही है. 4 अप्रैल 2023 को पूर्व मंत्री दिवंगत रामदास सोरेन ने कान्हू मुंडा के गांव में जनता दरबार लगाकर सरेंडर करने के बाद जेल से छूटे पूर्व नक्सलियों और जेल में बंद नक्सलियों के परिजनों की समस्याएं सुनी थीं. उस वक्त एक पुल बना दिया, पर सड़क नहीं बनी. मंत्री के जनता दरबार लगाने बाद एक पुल बना और चेकडैम बाकी है. आश्वासन मिला बनेगा. इस गांव के लोग आज भी पत्ता, लकड़ी बेचकर गुजारा करते हैं. युवा रोजगार के लिए बाहर पलायन कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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