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East Singhbhum News : चाकुलिया में सरकारी अस्पतालों की फूल रहीं सांसें

Updated at : 08 Nov 2025 11:44 PM (IST)
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East Singhbhum News : चाकुलिया में सरकारी अस्पतालों की फूल रहीं सांसें

स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल. प्रखंड की दो लाख की आबादी बंगाल व ओडिशा के भरोसे

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चाकुलिया.

पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की सांसें फूल रही हैं. मरीज पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा के भरोसे हैं. प्रखंड के सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की घोर कमी है. यहां करोड़ों की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन बना है. हालांकि, संसाधनों का अभाव है. यहां प्रतिदिन 150 से 200 मरीज पहुंचते हैं. सीएचसी में एक भी ड्रेसर नहीं है. सफाईकर्मी, नाइट गार्ड और अनुसेवी मरीजों की ड्रेसिंग (मरहम पट्टी) करते हैं. लगभग 6 वर्ष पहले आउटसोर्स पर तैनात ड्रेसरों को हटा दिया गया. चाकुलिया प्रखंड की लगभग 2 लाख की आबादी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे है.

सीएचसी में सात चिकित्सकों के पद सृजित, तीन कार्यरत

सीएचसी में चिकित्सकों की कमी है. यहां चार जेनरल फिजिशियन और तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद सृजित है. यहां दो जेनरल फिजिशियन व एक दंत चिकित्सक उपलब्ध है. अगर एक भी चिकित्सक छुट्टी पर जाते हैं, तो अस्पताल चलाना मुश्किल हो जाता है.

हर माह 100 से 150 प्रसव महिला चिकित्सक नहीं

चाकुलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सबसे अधिक प्रसव होते हैं. यहां महीने में 100 से 150 महिलाओं का प्रसव कराया जाता है, परंतु महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं. लंबे समय से क्षेत्र के लोग मांग कर रहे हैं. प्रशिक्षित एएनएम ही महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराती हैं. दंत विभाग में एक्स-रे की सुविधा नहीं, बंगाल जाते हैं मरीज

चाकुलिया में दंत विशेषज्ञ चिकित्सक के तौर पर डॉक्टर झूलन दास पदस्थापित हैं. विधायक समीर मोहंती की पहल पर तमाम संसाधन उपलब्ध करा दिया गया. हालांकि, एक्स-रे की सुविधा नहीं रहने से मरीज को परेशान होना पड़ रहा है. कई मरीजों ने बताया कि दांत उखड़वाने के लिए अस्पताल पहुंचे, तो एक्स-रे की सलाह दी गयी. इसके लिए पश्चिम बंगाल स्थित झाड़ग्राम जाना पड़ता है.

विधायक ने संसाधन उपलब्ध कराया पर नहीं मिल रहा लाभ

विधायक ने निजी फंड से अस्पताल को कई एयर कंडीशन उपलब्ध कराये हैं, जो ओपीडी और जनरल वार्ड में लगे हैं. दंत चिकित्सक के संसाधन और एक्स-रे मशीन भी उपलब्ध करायी है. इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन छोटी-मोटी समस्याओं को दरकिनार कर मरीज को पश्चिम बंगाल और ओडिशा भटकने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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