ePaper

कोल्हान विश्वविद्यालय के 80 हजार स्टूडेंट्स का भविष्य अंधेरे में, वीसी, प्रोवीसी, रजिस्ट्रार समेत कई पद रिक्त

Updated at : 13 Jun 2024 9:26 PM (IST)
विज्ञापन
kolhan university jharkhand news

कोल्हान विश्वविद्यालय.

कोल्हान विश्वविद्यालय के 80 हजार स्टूडेंट्स का भविष्य अंधेरे में है. विश्वविद्यालय में वीसी, प्रोवीसी, रजिस्ट्रार समेत समेत कई अहम पद खाली हैं.

विज्ञापन

जमशेदपुर, संदीप सावर्ण : कोल्हान विश्वविद्यालय इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. विश्वविद्यालय में कुलपति का पद मई 2023 से खाली है. पूर्व कुलपति डॉ गंगाधर पांडा के रिटायर होने के बाद अब तक किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी है.

कोल्हान आयुक्त को सौंपा गया है कुलपति का प्रभार

राजभवन की ओर से कुलपति का प्रभार कोल्हान आयुक्त को सौंपा गया है. एक साल से आयुक्त प्रभार में हैं. उन्हें सिर्फ वेतन, पेंशन व अन्य रुटीन कार्य की जिम्मेदारी दी गयी है. नीतिगत फैसले लेने का अधिकार उन्हें नहीं है.

कई महत्वपूर्ण काम हो गए हैं ठप

नतीजा विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण कार्य ठप हो गये हैं. विश्वविद्यालय का समग्र विकास नहीं हो रहा है. इतना ही नहीं विश्वविद्यालय में प्रोवीसी, रजिस्ट्रार, फाइनांस ऑफिसर के साथ-साथ सीसीडीसी के पद भी रिक्त हैं. सभी पद प्रभारी के भरोसे चल रहे हैं. इसका खामियाजा झारखंड के छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है. ना तो समय पर डिग्री सर्टिफिकेट मिल रहा है और ना ही किसी तरह का प्रमाण पत्र. प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी कई काम प्रभावित हो रहे हैं.

13 अगस्त 2009 को हुई थी कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना

गौरतलब है कि कोल्हान विवि की स्थापना 13 अगस्त 2009 को हुई थी. इससे पूर्व सरायकेला-खरसांवा, पूर्वी सिंहभूम व पश्चिमी सिंहभूम जिले के कॉलेजों का संचालन रांची विवि के अधीन होता था. कोल्हान विवि के गठन को लेकर दलील दी गयी थी कि इसकी स्थापना होने से प्रमंडल के गरीब और आदिवासी छात्र-छात्राओं को कोल्हान में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी. लेकिन, जिस प्रकार से पिछले एक साल से स्थिति उत्पन्न हुई है, इसका सीधा असर करीब 80 हजार छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है. जनप्रतिनिधि से लेकर छात्र-छात्राएं राजभवन की ओर टकटकी लगाए हुए है कि न जाने कब स्थायी कुलपति समेत अन्य पदों पर नियुक्ति होगी.

कौन-कौन से काम हो रहे हैं प्रभावित

विश्वविद्यालय में वीसी और प्रोवीसी के पद रिक्त होने के कारण कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं. सिंडिकेट, फाइनेंस कमेटी, एकेडमिक काउंसिल, एग्जामिनेशन बोर्ड, बिल्डिंग कमेटी की बैठक नहीं हो पा रही है. विद्यार्थियों का दीक्षांत समारोह तक लटका हुआ है, छात्र संघ का चुनाव नहीं हो पा रहा है. कारण कि सिंडिकेट की बैठक में विश्वविद्यालय से संबंधित विभिन्न एजेंडों को प्रस्तुत किया जाता है, जिस पर विचार-विमर्श के बाद आवश्यक निर्णय लिया जाता है. साथ ही, विभिन्न प्रस्तावों को पारित कर अनुमति के लिए सरकार के पास भेजा जाता है.

एकेडमिक काउंसिल में सिलेबस से संबंधित निर्णय लिए जाते हैं

इसी तरह, फाइनेंस कमेटी की बैठक में विश्वविद्यालय के वित्तीय, एकेडमिक काउंसिल की बैठक में सिलेबस आदि से संबंधित निर्णय लिये जाते हैं. वीसी समेत अन्य महत्वपूर्ण पद खाली रहने की वजह से इससे संबंधित कोई काम नहीं हो पा रहा है. हालत यह है कि विवि के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में आउटसोर्स पर जितने साफ-सफाई कर्मी या सुरक्षाकर्मी बहाल हैं, उनका कार्य रिन्युअल भी नहीं हो रहा है, जिससे कॉलेजों में साफ-सफाई भगवान भरोसे है.

कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना कब हुई थी?

कोल्हान विवि की स्थापना 13 अगस्त 2009 को की गई थी. कोल्हान प्रमंडल के 3 जिलों सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम एवं पश्चिमी सिंहभूम के कॉलेज इस विश्वविद्यालय के अधीन आते हैं.

कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले कौन सा विश्वविद्यालय था?

कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावां जिलों के कॉलेज रांची विश्वविद्यालय के अधीन थे.

इसे भी पढ़ें

कोल्हान विश्वविद्यालय में होने वाली परीक्षा सवालों के घेरे में, 6 के बजाय डेढ़ माह में ही हुआ एग्जाम, पेपर आउट ऑफ सिलेबस

कोल्हान विश्वविद्यालय : स्नातक ओल्ड कोर्स की इंटरनल व प्रैक्टिकल परीक्षा 18 से 22 तक

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola