East Singhbhum News : डुमरिया में 10 और परिवारों को समाज से निकाला, बीडीओ से गुहार

Published by :ATUL PATHAK
Published at :17 Apr 2026 12:05 AM (IST)
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East Singhbhum News : डुमरिया में 10 और परिवारों को समाज से निकाला, बीडीओ से गुहार

पीड़ित परिवार के लोग पहुंचे ब्लॉक बीडीओ ने दिया आश्वासन

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डुमरिया. पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड में सामाजिक बहिष्कार का मामला थम नहीं रहा है. प्रशासन और बुद्धिजीवियों की तमाम कोशिशों के बाद भी धरातल पर स्थिति गंभीर बनी हुई है. 118 परिवारों के बहिष्कार का पुराना मामला अभी सुलझा नहीं है कि गुरुवार को 10 और परिवारों ने सामाजिक बहिष्कार की शिकायत दर्ज करायी है. इन परिवारों ने डुमरिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) निलेश कुमार मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगायी है.

इन गांवों के परिवार हुए प्रभावित

नये पीड़ित परिवारों में छोटाबोतला गांव के पांच परिवार, केंदुआ का एक, पोड़सा का एक और ऊपर बांकीशोल गांव के तीन परिवार शामिल हैं. आवेदन देने वालों में धनाई हांसदा, सिमाल टुडू, ठाकरा सोरेन, लेदेम मुर्मू, शुरू सरदार, जन्मेंजय भकत और वीरसिंह सरदार सहित अन्य मौजूद थे.

राशन और सरकारी योजनाओं पर भी रोक:

पीड़ित परिवारों ने बीडीओ को बताया कि ग्राम प्रधानों और गांव के कुछ दबंग ने उनका पूर्णतः बहिष्कार कर दिया है. उन्हें न केवल सामाजिक और धार्मिक स्थलों पर जाने से रोका जा रहा है, बल्कि राशन की दुकानों से सामान लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से भी वंचित कर दिया गया है. सबसे भयावह स्थिति यह है कि गांव के अन्य लोगों को भी इन परिवारों से बात न करने की हिदायत दी गयी है. बात करने पर भारी जुर्माने की धमकी दी जा रही है.

बीडीओ ने दिया समाधान का आश्वासन

बीडीओ निलेश कुमार मुर्मू ने पीड़ितों को आश्वस्त किया है कि वे संबंधित गांवों के प्रधानों से मिलकर मामले की गहन जांच करेंगे. उन्होंने कहा कि नियम विरुद्ध सामाजिक बहिष्कार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जल्द ही संवाद के जरिए इसका समाधान निकाला जाएगा ताकि प्रभावित परिवारों का जीवन सामान्य हो सके.

जमीन विवाद व झूठे आरोप लगाये गये

आवेदन में कहा गया है कि यह बहिष्कार जमीन विवाद और झूठे आरोपों के आधार पर किया गया है. पीड़ितों का आरोप है कि उनसे 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक के दंड की मांग की गई थी, जिसे न दे पाने के कारण उन्हें समाज से अलग कर दिया गया. इस बहिष्कार के कारण बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और दैनिक जीवन पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है और सभी परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

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