East Singhbhum News : भूमि विवाद में फंसा बारुनिया स्कूल का निर्माण, क्लब के बरामदे में पढ़ रहे बच्चे

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 13 Feb 2026 12:02 AM

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दानदाता के वंशज कर रहे विरोध सड़क किनारे की जमीन पर व्यवसाय की मंशा

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मुसाबनी. मुसाबनी प्रखंड के बारुनिया प्राथमिक विद्यालय के बच्चों का भविष्य भूमि विवाद की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है. विद्यालय भवन के अभाव में 41 बच्चे पिछले एक साल से गांव के क्लब भवन के बरामदे में फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं. प्रशासन से फंड स्वीकृति के बाद ठेकेदार द्वारा काम शुरू करने के बावजूद दानदाता परिवार के विरोध के कारण निर्माण कार्य ठप पड़ा है.

1985 में बना भवन हुआ जर्जर, क्लब बना सहारा:

बता दें कि विद्यालय का पुराना भवन 1985 में बना था, जो जर्जर हो गया. सुरक्षा को देखते हुए ग्रामीणों ने एक साल पहले कक्षाएं क्लब भवन में शिफ्ट कर दी थीं. ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन ने जुलाई में 16 लाख रुपये की लागत से दो कमरों के निर्माण की स्वीकृति दी. नमन इंटरप्राइजेज को इसका टेंडर मिला.

निर्माण शुरू होते ही उपजा विवाद:

संवेदक ने नवंबर माह में जर्जर भवन को ध्वस्त कर नींव के लिए गड्ढा खोदा और निर्माण सामग्री भी कार्यस्थल पर गिरा दी. तभी भूमि दानदाता स्व. वास्ता मुर्मू के पोते वास्ता मुर्मू और राजेश मुर्मू ने काम रुकवा दिया. उनका कहना है कि वे सड़क किनारे की कीमती जमीन पर अब व्यवसाय करना चाहते हैं. उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि स्कूल किसी दूसरी जगह बनाया जाए, जिसके लिए वे जमीन देने को तैयार हैं.

प्रशासनिक स्तर पर समाधान की कोशिशें नाकाम:

मामले को सुलझाने के लिए अंचल कार्यालय में आवेदन दिया गया है. ग्राम स्तर पर तीन बार बैठक भी हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. संवेदक का कहना है कि यदि ग्रामीण और प्रशासन मिलकर विवाद सुलझा लें, तो निर्माण कार्य तत्काल शुरू कर दिया जाएगा. इस गतिरोध के बीच सबसे ज्यादा नुकसान उन बच्चों का हो रहा है, जिन्हें ठंड और बारिश के मौसम में खुले बरामदे में बैठना पड़ता है.

एक कमरे में पढ़ाई, दफ्तर और एमडीएम का राशन

विद्यालय की स्थिति वर्तमान में बेहद दयनीय है. स्कूल में कुल 41 विद्यार्थी (26 बालक, 15 बालिका) नामांकित हैं. कक्षा 1 से 3 तक के बच्चे बरामदे में फर्श पर बैठते हैं. कक्षा 4 और 5 के बच्चों को एक छोटे से कमरे में बैठाया जाता है, जहां स्कूल का कार्यालय भी है और मिड डे मील का चावल भी रखा जाता है. प्रधानाध्यापिका लक्ष्मी हांसदा और पारा शिक्षिका मंजू हासदा इसी सीमित संसाधन में बच्चों को पढ़ा रही हैं.

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