जादूगोड़ा में ब्रेन मलेरिया का कहर: 25 वर्षीय युवक की मौत से गांव में सन्नाटा, ग्रामीणों में दहशत

Author Ranjan gupta|Edited by Priya Gupta
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जादूगोड़ा में ब्रेन मलेरिया का कहर: 25 वर्षीय युवक की मौत से गांव में सन्नाटा, ग्रामीणों में दहशत

फोटो - मृतक के परिजन। | Prabhat Khabar Network

जादूगोड़ा के झरिया गांव में ब्रेन मलेरिया से 25 वर्षीय युवक की मौत के बाद ग्रामीणों में दहशत। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, परिवार ने मांगी मदद।

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प्रतिनिधि, जादूगोड़ा

जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के झरिया गांव में ब्रेन मलेरिया से 25 वर्षीय युवक की मौत के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है. इस घटना ने ग्रामीणों के बीच गहरी दहशत पैदा कर दी है. तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद क्षेत्र में ब्रेन मलेरिया से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ब्रेन मलेरिया से जूझ रहे युवक ने तोड़ा दम: मृतक की पहचान झरिया गांव निवासी रितिक सिंह (25) के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार, रितिक को 5 जून को ब्रेन मलेरिया ने अपनी चपेट में ले लिया था. शुरुआती दो दिनों तक घर पर ही उसका इलाज किया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे गालूडीह के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. 10 जून को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बावजूद उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. इसके बाद परिजनों ने उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे जमशेदपुर सदर अस्पताल रेफर किया गया. हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे एमजीएम अस्पताल भेज दिया, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए रांची के रिम्स अस्पताल रेफर किया गया. रिम्स की दूरी अधिक होने के कारण परिजन उसे रास्ते में ही एक अन्य अस्पताल ले गये, लेकिन दुर्भाग्यवश वहां उसकी मौत हो गयी.

रितिक के शव को निजी वाहन से वापस झरिया गांव लाया गया, जहां शनिवार देर शाम उसका अंतिम संस्कार किया गया. घटना के बाद पूरे गांव में भय और शोक का माहौल है. इलाज में खर्च हुई जमा-पूंजी, अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं बचे पैसे: मृतक के पिता विजय सिंह दिहाड़ी मजदूर हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे जुटाना मुश्किल हो गया. मृतक के चाचा बाबूलाल सिंह ने भावुक होकर बताया कि इलाज में ही करीब 30 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं और अब दाह-संस्कार के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं. परिवार ने राज्य सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है. मृतक की बहन अंजली सिंह ने बताया कि समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पाने और बार-बार रेफर किए जाने के कारण स्थिति और बिगड़ती चली गयी. गौरतलब है कि पोटका प्रखंड में अब तक ब्रेन मलेरिया से छह लोगों की मौत हो चुकी है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले के सिविल सर्जन डॉ. साहिर पॉल ने क्षेत्र में चिकित्सकों की टीम तैनात की है, फिर भी हालात काबू में नहीं आ पा रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने, दवा छिड़काव, मच्छर नियंत्रण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.


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