Chaibasa News : श्रद्धा, उत्साह व लोक परंपरा का संगम

तांतनगर. श्रद्धा व परंपरा के साथ आदिवासी हो समाज ने मनाया मागे पर्व, दियुरी ने की पूजा
तांतनगर. तांतनगर प्रखंड में रविवार को आदिवासी हो समाज का सबसे बड़ा पर्व मागे पर्व श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. मौके पर तांतनगर सहित दर्जन भर गांवों के ग्रामीण शामिल हुए. सभी गांवों में मकर संक्रांति के साथ मागे पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. पर्व को लेकर विभिन्न गांवों से लोगों के तांतनगर पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था. यहां पहुंचकर ग्रामीण अपने सगे-संबंधियों के घर गए और अपने साथ लाए अनाज व अन्य उपहार भेंट किए. इसके पश्चात गांव की सीमा तक दुरात्मा (हरमागेया) को भगाने की पारंपरिक रस्म निभायी गयी, जिसके साथ हरमागेया अनुष्ठान संपन्न हुआ.
नगाड़ा व मांदर की थाप पर झूमा तांतनगर
इस दौरान प्रत्येक गांव के मुख्य पुजारी (दियुरी) सहित सात सदस्यीय पुजारी दल ने निर्धारित पूजा स्थल पर विधिवत पूजा-पाठ कर गांव की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की. इसके बाद नागड़ा और मांदर की थाप पर नृत्य-गान करते हुए पुजारियों को पूजा स्थल तक ले जाया गया, जहां सूर्य देवता (सिंहबोंगा) की आराधना कर गांव के कल्याण की प्रार्थना की गयी. पर्व के दौरान पूजा स्थल पर पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अपशब्दों का प्रयोग भी किया गया. मान्यता है कि इस परंपरा के पालन से ही पूजा सफल मानी जाती है. स्थानीय विश्वास के अनुसार यदि इस परंपरा का पालन नहीं किया जाए तो पूजा में चढ़ाया गया मुर्गा दाना नहीं खाता, जिससे पूजा अधूरी मानी जाती है. इसी कारण परंपरागत रीति-रिवाजों का पूर्ण रूप से पालन किया गया.
युवाओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर बांधा समां
मागे पर्व को लेकर गांव-गांव में नृत्य स्थलों को रंग-बिरंगी और चमकदार झालरों से सजाया गया था. यहां दिन-रात नृत्य और गीतों का दौर चलता रहा, जिसमें युवाओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया. रात के समय माघे नृत्य देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी.पर्व के दूसरे दिन, जिसे बासी पर्व कहा जाता है, घरों में स्वादिष्ट और पारंपरिक व्यंजन बनाए गए. इस दिन मेहमानों की जमकर आवभगत की गयी. मान्यता है कि जितनी अधिक मेहमाननवाजी होती है, उतनी ही घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है.इसमें तांतनगर, इलिगाड़ा, कुलाबुरु, तुईबाना, उकुगुटू, सेरेंगबिल, बानाबीर, कासेया, हिन्दूडीह, मिरुडीह के ग्रामीणों ने भाग लिया.
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