बीनपुर, झिलीमिली के बाद अब झारखंड पहुंचा वायरस
Updated at : 11 May 2017 5:56 AM (IST)
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घाटशिला : घाटशिला के बड़ादाधिका में लॉटरी खेल में बरती गयी धांधली के बाद से लॉटरी के धंधेबाज सहमें हुए हैं. बंगाल के बीनपुर और झिलीमिली के बाद लॉटरी के धंधेबाजों ने बड़ादाधिका में लॉटरी खेल के नाम पर वायरस फैलाने का काम किया. आदिवासी शिक्षा विकास पुस्तकालय के तत्वावधान में लॉटरी खेल में धांधली […]
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घाटशिला : घाटशिला के बड़ादाधिका में लॉटरी खेल में बरती गयी धांधली के बाद से लॉटरी के धंधेबाज सहमें हुए हैं. बंगाल के बीनपुर और झिलीमिली के बाद लॉटरी के धंधेबाजों ने बड़ादाधिका में लॉटरी खेल के नाम पर वायरस फैलाने का काम किया. आदिवासी शिक्षा विकास पुस्तकालय के तत्वावधान में लॉटरी खेल में धांधली बरतने के नाम पर उपद्रवियों ने एक वाहन को फूंक दिया और तीन वाहनों के साथ तोड़फोड़ की.
बड़ाधादिका से पूर्व लॉटरी के धंधेबाजों ने बंगाल के तीन जगहों पर अपना जाल बिछाया और लॉटरी के नाम पर लाखों की राशि वसूली. ग्रामीण दबी जुबान से इस बात की जानकारी देते हैं. पुस्तकालय के नाम पर बंगाल के लॉटरी के धंधेबाजों ने घाटशिला क्षेत्र में जाल बिछाया . सात मई की रात बड़ादाधिका में लॉटरी का खेल शुरू हुआ था. अचानक भीड़ में से कई लोग निकले और बंगाल से लाये गये वाहनों को आग के हवाले करना शुरू कर दिया और कई वाहनों के साथ तोड़फोड़ की.
कौन बंगाल का मास्टर माइंड
पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा पायी है कि पुस्तकालय के नाम पर बड़ादाधिका में कराये जा रहे लॉटरी खेल का मास्टर माइंड बंगाल का कौन है. पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच की जा रही है. कुछ लोगों के नाम सामने आये हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए छापामारी की जा रही है.
गैस सिलिंडर वाली वाहन को नहीं फूंका
उपद्रवियों ने बंगाल से लायी गयी मारुति वैन जो गैस से संचालित होती है. उसे उपद्रवियों ने आग के हवाले नहीं किया. केवल तोड़फोड़ की. क्योंकि उपद्रवियों को इस बात की जानकारी थी कि अगर मारुति वैन में आग लगायी जाती है तो बड़ा हादसा हो सकता है. नतीजतन उपद्रवियों ने उक्त वाहन में आग नहीं लगायी. उसे क्षतिग्रस्त कर दिया.
मुंह नहीं खोल रहे हैं ग्रामीण
पुलिस का मानना है कि लॉटरी का खेल पुस्तकालय के माध्यम से कराया जा रहा था. मगर जब घटना घटी. इसके बाद पुलिस इस मामले की जांच में पहुंची तो ग्रामीणों से घटना को अंजाम देने वाले लोगों के नाम जानना चाहा. मगर पुलिस को ग्रामीणों से मदद नहीं नहीं मिली. पुलिस जब इस मामले की जानकारी ग्रामीणों से लेना चाहती है तो ग्रामीण ही पुलिस के खिलाफ गोलबंद हो जाते हैं. इसके कारण पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ता है.
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