अनुभवों का खजाना हैं बुजुर्ग, उनसे सीखें
Updated at : 08 May 2017 9:36 AM (IST)
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घाटशिला : घाटशिला के विद्या भारती संचालित बलदेवदास संतलाल सरस्वती विद्या मंदिर में रविवार को प्रधानाध्यापक पद्मलोचन महतो की अध्यक्षता में दादा-दादी, नाना-नानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. समारोह में बतौर मुख्य अतिथि घाटशिला की जिला परिषद सदस्य पूर्णिमा कर्मकार, विशिष्ठ अतिथि प्रो मित्रेश्वर ने भारत माता, सरस्वती माता और ऊं की तसवीर पर […]
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घाटशिला : घाटशिला के विद्या भारती संचालित बलदेवदास संतलाल सरस्वती विद्या मंदिर में रविवार को प्रधानाध्यापक पद्मलोचन महतो की अध्यक्षता में दादा-दादी, नाना-नानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया.
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि घाटशिला की जिला परिषद सदस्य पूर्णिमा कर्मकार, विशिष्ठ अतिथि प्रो मित्रेश्वर ने भारत माता, सरस्वती माता और ऊं की तसवीर पर माल्यार्पण कर उदघाटन किया. विद्यालय परिवार ने मुख्य और विशिष्ठ अतिथि को शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया. जिप सदस्य ने कहा कि इस विद्यालय में पढ़ने वाले भैया- बहन दादा-दादी, नाना-नानी पर विशेष ध्यान दें. उन्होंने कहा दादा-दादी, नाना-नानी अनुभवों के खजाना है, इनके मार्गदर्शन से कठिन कार्य भी सहज हो जाते हैं.
खजानों प्रो मित्रेश्वर ने कहा कि बीते दो दशकों में काफी बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि अभी के समय में सभी लोग एकल परिवार बसाने में लगे हैं. लेकिन सामूहिक परिवार को लेकर चलने की सोच सभी को रखनी चाहिए. तब जाकर आगे बढ़ सकते हैं. समाराह का संचालन पवन कुमार दास ने किया. दादा-दादी, नाना-नानी सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में भैया- बहनें उपस्थित थे. इस मौके पर भैया-बहनों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया. दादा-दादी और नाना-नानी को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर सुदामा सिंह, धनंजय सिंह, शांति राम महतो, मिथिलेश कुमार सिंह समेत आचार्य-आचार्या उपस्थित थे.
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