फर्श पर सुला कर किया जाता है प्रसूता व नवजात का इलाज

मुसाबनी : मुसाबनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संस्थागत प्रसव कराने आये प्रसूता एवं नवजात को फर्श में लेटकर अपना इलाज कराना पड़ता है. सोमवार को मेढ़िया के संतोष पातर की पत्नी प्रमिला पातर अपनी नवजात बेटी को लेकर घर से आये बिछावन पर लेट कर सीएचसी में इलाज करा रही थी. देवली की मंगलू धीबर […]
मुसाबनी : मुसाबनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संस्थागत प्रसव कराने आये प्रसूता एवं नवजात को फर्श में लेटकर अपना इलाज कराना पड़ता है. सोमवार को मेढ़िया के संतोष पातर की पत्नी प्रमिला पातर अपनी नवजात बेटी को लेकर घर से आये बिछावन पर लेट कर सीएचसी में इलाज करा रही थी.
देवली की मंगलू धीबर की पत्नी सावित्री धीबर भी अपने नवजात बेटे को लेकर फर्श पर लेट कर इलाज करा रही थी. वहीं भंडारबोरो की गर्भवती कपूरमनी टुडू भी फर्श पर लेटी थी, उसकी हालत नाजुक देख कर उसे एमजीएम रेफर कर दिया गया. मुसाबनी सीएचसी में एक कमरे में छह बेड है. जब संस्थागत प्रसव कराने वाले गर्भवतियों की संख्या बढ़ जाती है, तो बेड की कमी के कारण फर्श पर ही उन्हें लिटा कर इलाज किया जाता है.
बेड की कमी है: डॉ बाखला
सीएचसी के चिकित्सा प्रभारी डॉ बाखला ने कहा कि अस्पताल में छह बेड की सुविधा है. ऐसे में जब प्रसव की संख्या बढ़ जाती है, तो मजबूर होकर फर्श पर लिटा कर प्रसूता एवं नवजात का इलाज करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि प्रसव के बाद 48 घंटे तक प्रसूता एवं नवजात को ओबजरवेक्षण के लिए रखने का प्रावधान है, लेकिन बेड तथा स्थान की कमी के कारण पहले ही रिलीज करना पड़ता है. डॉ बाखला मानते हैं कि फर्श पर प्रसूता तथा नवजात को लिटाना चिकित्सीय दृष्टि से गलत है.
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