ePaper

East Singhbhum News : काड़ाडूबा के 80% परिवार बनाते थे मिट्टी के बर्तन, अब 5% बचे

Updated at : 07 Oct 2025 11:55 PM (IST)
विज्ञापन
East Singhbhum News : काड़ाडूबा के 80% परिवार बनाते थे मिट्टी के बर्तन, अब 5% बचे

DCIM100MEDIADJI_0190.JPG

पेशा पर संकट : लगातार बारिश ने बढ़ायी परेशानी, दीपावली, काली पूजा और छठ पर्व को लेकर तैयारियों में जुटा कुम्हार समाज

विज्ञापन

घाटशिला. घाटशिला की काड़ाडूबा पंचायत के काडाडूबा गांव में कुम्हार समाज मिट्टी से बर्तन बनाकर आजीविका चलाता है. बीते तीन-चार माह से लगातार हो रही बारिश से आजीविका पर संकट आ गया है. कुम्हार परिवार मिट्टी के दीये, कलश, हंडी, धूपदानी आदि बनाकर गुजारा करते हैं. बरसात में मिट्टी के बर्तन बनाना कठिन हो गया है. कुम्हार घरों में चाक चलाकर किसी तरह बर्तन बना रहे हैं. 1980 के दशक में गांव के लगभग 80 प्रतिशत परिवार मिट्टी के बर्तन बनाकर जीवन यापन करते थे. अब केवल 5 प्रतिशत परिवार यह काम कर रहे हैं. गांव में करीब 200 परिवार और लगभग 1000 की आबादी है. अब सिर्फ 10 घरों में चाक चलता है.

परंपरा बचाये हुए हैं कुछ परिवार:

वर्तमान में शिशिर कुमार पाल, प्रेस पाल, राधिका रंजन पाल, जगन्नाथ पाल, प्रोमोथो पाल, राजीव रंजन पाल, घासी राम पाल और शंभू पाल जैसे कारीगर मिट्टी के बर्तन बनाकर इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं. बरसात की बाधाओं के बावजूद, कुम्हार समुदाय के ये कारीगर दीपावली, काली पूजा, सोहराय कथा और छठ पर्व पर अपने चाक को पुनः चलाने लगे हैं.

पहले जैसे लाभ नहीं होता, पूर्वजों की विरासत बचा रहा हूं : शिशिर

70 वर्षीय शिशिर पाल कहते हैं कि मिट्टी के बर्तन बनाने में पहले जैसा लाभ नहीं है. पूर्वजों की विरासत को छोड़ना नहीं चाहता हूं. दीपावली, काली पूजा व त्योहारों पर उत्पादन और बिक्री बढ़ जाती है, पर अब ग्राहक कम होने लगे हैं. चीनी, स्टील और ब्रास के बर्तनों ने मिट्टी के बर्तनों की बिक्री प्रभावित की है.

सरकार इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराये : जगन्नाथ

कुम्हार जगन्नाथ पाल ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से व्यवसाय कर रहे हैं. मांग घट रही है. अब किसी तरह इस पेशे से अपना गुजारा कर पा रहे हैं. वे सरकार से इलेक्ट्रिक चाक और सामुदायिक भवन की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि काम आसान हो सके.

पेशा बचाने के लिए सुविधाएं मिलनी जरूरी : कालीपदो

ग्राम प्रधान सह सेवानिवृत्त शिक्षक कालीपदो पाल ने बताया कि सरकार ने भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिससे लोग दूसरे रोजगार की ओर चले गये. ग्राम प्रधान ने सुझाव दिया कि पेशा को बचाने के लिए सरकार को संसाधन, सस्ते ईंधन, आवास और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
ATUL PATHAK

लेखक के बारे में

By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola