नक्सल प्रभावित क्षेत्र के युवकों ने उगायी नर्सरी

Published at :07 Jul 2015 8:33 AM (IST)
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नक्सल प्रभावित क्षेत्र के युवकों ने उगायी नर्सरी

बोड़ाम : दो बीघा जमीन में लगाये हजारों पौध चारा दिलीप पोद्दार पटमदा : जिले के नक्सल प्रभावित माने जाने वाले बोड़ाम के तीन बेरोजगार युवकों ने ना सिर्फ आत्मनिर्भरता में एक मिसाल कायम की है, बल्कि अपने क्षेत्र में खेती के विकास के नये रास्ते भी खोले हैं. जादव महतो, फटीक महतो और कृटी […]

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बोड़ाम : दो बीघा जमीन में लगाये हजारों पौध चारा
दिलीप पोद्दार
पटमदा : जिले के नक्सल प्रभावित माने जाने वाले बोड़ाम के तीन बेरोजगार युवकों ने ना सिर्फ आत्मनिर्भरता में एक मिसाल कायम की है, बल्कि अपने क्षेत्र में खेती के विकास के नये रास्ते भी खोले हैं. जादव महतो, फटीक महतो और कृटी महतो ने दलमा की तलहटी में बसे बोड़ाम के बड़तल में एक नर्सरी तैयार की है.
दो बीघा जमीन पर फैले इस नर्सरी में कासीया (सोना झुरी) के 70 हजार पौधा, यूकेलिप्टस के 20 हजार पौधे, गम्हार के छह हजार, काजू के एक हजार, सिमल के पांच हजार, कटहल के एक हजार, जामुन के दो हजार, पपीता का एक हजार, आम का एक हजार, मेहीगिनी के पांच हजार और नीम के एक हजार पौधों का चारा लगाया गया है.
इस नर्सरी को तैयार करने में तीन महीने लगे हैं. 22 मार्च 2015 को इस नर्सरी की शुरुआत की गयी थी. इन युवकों को नर्सरी की बारिकियों के बारे में और प्रोजेक्ट तैयार करने में बोड़ाम के ही कैलाश सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है.
इस चारा नर्सरी में 15 मजदूर काम कर रहे हैं. इन युवकों को उम्मीद है कि इस क्षेत्र में किसानों का रुझान इन लकड़ी तैयार करनेवाले पेड़ों और सब्जी व फल के पौधों की ओर होगा, जिससे सालों भर उनकी आमदनी का जरिया पैदा हो सके. अभी यहां के कुछ किसान गालूडीह, जमशेदपुर या रांची की नर्सिरियों से पौधा लाकर इसे लगाते हैं. लेकिन यह बहुत थोड़ा है. नर्सरी तैयार करने में अब तक इन युवकों के डेढ़ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. बकरियों के नर्सरी में घुस आने के कारण इन्हें कुछ नुकसान भी ङोलना पड़ा है, लेकिन फिर भी इनका जज्बा बरकरार है.
टमाटर व बैगन में कमाया पचास हजार
तीनों दोस्तों ने मिल कर इससे पूर्व क्षेत्र में टमाटर व बैंगन की खेती की थी, जिसमें पचास हजार रुपये मुनाफा कमाया था. बीहड़ जंगल क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र के ज्यादातर ग्रामीण जंगल की सूखी लकड़ी, फल, फूल आदि कामों पर आश्रित है. फटीक महतो ने बताया कि इससे पूर्व डेढ़ बीघा जमीन पर बंैगन व टमाटर की खेती में मिली सफलता के बाद उससे हुई आमदनी को नर्सरी के कार्य में लगाया है.
केसीसी लोन लेकर शुरू की नर्सरी : जादव
जादव महतो ने बताया कि बोड़ाम ग्रामीण बैंक से 30-30 हजार रुपये का केसीसी लोन लेकर हम लोगों ने नर्सरी का काम शुरू किया. नर्सरी को तैयार करने में डेढ़ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. नर्सरी में तैयार किये गये सभी पौध चारा देसी है. हम तीनों दोस्त अबतक इस नर्सरी में 50-50 हजार रुपये लगा चुके हैं. पौध चारा के बिक्री होने से हमारा पैसा वापस आने लगा है. अबतक पचास हजार पौधा चारा की बुकिंग हो चुकी है.
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