मुसाबनी : इलाज के अभाव में पांव का जख्म बना नासूर

Published at :29 Dec 2014 11:01 AM (IST)
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मुसाबनी : इलाज के अभाव  में पांव का जख्म बना नासूर

मुसाबनी : तेरंगा के घाघराडीह निवासी वनमाली धीबर पिछले छह साल से उचित इलाज के अभाव में परेशानी ङोल रहा है. अज्ञानता तथा आर्थिक तंगी के कारण वनमाली अपने पैर के घाव का इलाज नहीं करा पा रहा है. उसका दायां पैर का जख्म नासूर बन गया है. वनमाली के पिता सनातन धीबर का कुल्हा […]

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मुसाबनी : तेरंगा के घाघराडीह निवासी वनमाली धीबर पिछले छह साल से उचित इलाज के अभाव में परेशानी ङोल रहा है. अज्ञानता तथा आर्थिक तंगी के कारण वनमाली अपने पैर के घाव का इलाज नहीं करा पा रहा है. उसका दायां पैर का जख्म नासूर बन गया है. वनमाली के पिता सनातन धीबर का कुल्हा भी टूट गया है.
वह चलने फिरने में असमर्थ है. परिवार का बोझ वनमाली की बूढ़ी मां छबि धीबर के कंधे पर है. वह दूसरों के घरों में मजदूरी कर बेटे तथा पति का पेट पाल रही है. वनमाली के अनुसार वह सोमायडीह में पत्थर निकालने का काम करता था. एक दिन वह पत्थर निकालने के क्रम में गड्ढे में दब गया. इससे उसका बायां जांघ टूट गया. पत्थर निकलवाने का काम करने वाले घाटशिला के मालिक ने उसका इलाज घाटशिला के एक नर्सिग होम में कुछ दिन करवाया.
उसके बाद उसे घर पहुंचा दिया गया. उसके बाद उसके दायें पैर के तलवे में चोट लग गयी और उचित इलाज के अभाव में पिछले पांच साल से परेशान हैं. वनमाली के अनुसार कभी कभी मां को रोजगार नहीं मिलता है, तो वह अपने दोस्तों के सहारे सुवर्णरेखा नदी जाता है और मछली पकड़ने वाले नाव चला कर थोड़ी बहुत कमाई कर लेता है. मऊभंडार कारखाने से महज पांच सौ मीटर दूरी पर स्थित घाघराडीह निवासी वनमाली धीबर को आज तक कोई चिकित्सा सुविधा नहीं मिली है.
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