गुड़ाबांदा से भाग आकाश संग रह रहा था भीम और कार्तिक

Updated at : 27 Dec 2017 4:39 AM (IST)
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गुड़ाबांदा से भाग आकाश संग रह रहा था भीम और कार्तिक

गुड़ाबांदा दस्ते में सक्रिय था कार्तिक कान्हू मुंडा के सरेंडर के पूर्व भाग कर बंगाल चला गया था घाटशिला : 15 फरवरी 2017 को नक्सली कान्हू मुंडा ने छह साथियों के साथ पूर्वी सिंहभूम जिला पुलिस कप्तान के समक्ष गुड़ाबांदा में सरेंडर किया था. उस दौरान उसके साथ कार्तिक उर्फ भीम सोरेन भी सरेंडर करने […]

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गुड़ाबांदा दस्ते में सक्रिय था कार्तिक
कान्हू मुंडा के सरेंडर के पूर्व भाग कर बंगाल चला गया था
घाटशिला : 15 फरवरी 2017 को नक्सली कान्हू मुंडा ने छह साथियों के साथ पूर्वी सिंहभूम जिला पुलिस कप्तान के समक्ष गुड़ाबांदा में सरेंडर किया था. उस दौरान उसके साथ कार्तिक उर्फ भीम सोरेन भी सरेंडर करने वाला था. ऐन मौके पर कार्तिक गुड़ाबांदा दस्ता छोड़ कर भाग गया. हालांकि कान्हू मुंडा ने अपने छह साथियों के साथ सरेंडर किया. खबरों के मुताबिक कार्तिक गुड़ाबांदा से भाग कर बंगाल चला गया. वहां असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ राकेश जी के साथ रहने लगा. काफी दिनों तक वह उनके साथ रहा.
खबर है कि विगत माह बासाडेरा के पास कोबरा बटालियन के साथ हुई मुठभेड़ के बाद कार्तिक यहां से भागा और संगठन से अलग-थलग रहने लगा. तभी से वह सरेंडर करने का मन बनाया. पश्चिमी मेदिनीपुर की एसपी भारती घोष कहती हैं कार्तिक ने सरेंडर करने की इच्छा जाहिर की. इसके बाद उन्होंने पूर्वी सिंहभूम की पुलिस से संपर्क किया.
चूंकि कार्तिक गुड़ाबांदा दस्ता का एरिया कमांडर था. उस पर 11 मामले दर्ज है, जिसमें 9 मामले पूर्वी सिंहभूम के विभिन्न थाना में दर्ज है. दो मामले बंगाल के बेलपहाड़ी में दर्ज है. गुड़ाबांदा थाना में कार्तिक के खिलाफ तीन यूएपी के मामले भी दर्ज हैं, जो संगीन है. इसलिए बंगाल पुलिस ने पूर्वी सिंहभूम पुलिस से संपर्क कर ज्वाइंट सरेंडर कराने का प्रयास किया और इसमें पुलिस को सफलता मिली.
गुडाबांदा दस्ता अब हो गया साफ
कान्हू समेत छह के सरेंडर के बाद ही गुड़ाबांदा दस्ता का सफाया हो गया था. कार्तिक के सरेंडर नहीं कर भाग जाने से पुलिस सतर्क रहती थी. अब कार्तिक के सरेंडर करने से एक तरह से गुड़ाबांदा दस्ता का पूरी तरह सफाया हो गया.
कार्तिक से पुलिस को मिली अहम जानकारियां
कार्तिक के सरेंडर करने से झारखंड और बंगाल पुलिस को संगठन के बारे में कई अहम जानकारियां मिली है. चूंकि कार्तिक संगठन के कई बड़े नेताओं के साथ रह चुका है. किशनजी के साथ भी वह लालगढ़ आंदोलन के दौरान था. वर्तमान में वह आकाश जी के साथ रहता था. कार्तिक के सरेंडर से बेलपहाड़ी में नक्सली गतिविधियां कम होंगी.
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