सरकारी व जन प्रतिनिधियों की उदासीनता से नहीं बना भवन

Updated at : 05 Dec 2017 7:26 AM (IST)
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सरकारी व जन प्रतिनिधियों की उदासीनता से नहीं बना भवन

झोपड़ी में स्कूल चलने से लगातार घटती गयी बच्चों की संख्या बहरागोड़ा : बहरागोड़ा प्रखंड की पश्चिम बंगाल सीमा से सटी गोपालपुर पंचायत स्थित गोबराशोल प्राथमिक विद्यालय सरकारी व जन प्रतिनिधियों की उदासीनता से एक झोपड़ी में चलता है. बच्चों का मध्याह्न भोजन भी झोपड़ी में बनता है. बरसात के दिनों स्कूल का संचालन मुश्किल […]

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झोपड़ी में स्कूल चलने से लगातार घटती गयी बच्चों की संख्या

बहरागोड़ा : बहरागोड़ा प्रखंड की पश्चिम बंगाल सीमा से सटी गोपालपुर पंचायत स्थित गोबराशोल प्राथमिक विद्यालय सरकारी व जन प्रतिनिधियों की उदासीनता से एक झोपड़ी में चलता है. बच्चों का मध्याह्न भोजन भी झोपड़ी में बनता है. बरसात के दिनों स्कूल का संचालन मुश्किल हो जाता है. यही कारण है कि इस स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार घटती गयी. अब सिर्फ 19 बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं. बच्चे जमीन पर बैठ कर पढ़ाई करते हैं.
विभाग के पास फंड नहीं : बीइइओ : पारा शिक्षिका गौरी दंडपाट ने बताया कि भवन निर्माण के लिए विभाग को कई बार अवगत कराया गया. कोई पहल नहीं हुई. उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में स्कूल चलाना मुश्किल हो जाता है. पंचायत समिति के सदस्य रवींद्र नाथ नायक ने कहा कि सरकारी उदासीनता से यहां भवन नहीं बन रहा है और बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं. अभी तक सिर्फ चार ही बेंच और डेस्क मिले हैं. उन्होंने कहा कि कई बार बैठक में भवन निर्माण की मांग की गयी. सिर्फ आश्वासन मिला. बीइइओ विनय कुमार दूबे का कहना है कि विभाग के पास फंड नहीं है. इसलिए भवन का निर्माण नहीं हो रहा है. विधायक कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि झोपड़ी में स्कूल का चलना दुर्भाग्य पूर्ण है. इस मामले को विधानसभा मेंं उठाउंगा.
वर्ष 2000 में बना भवन हुआ जर्जर, ग्रामीणों ने बच्चों को भेजना किया था बंद
ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल के भवन का निर्माण वर्ष 2000 में डीपीपी के तहत हुआ था. कुछ वर्षों में भवन जर्जर हो गया. कोई अप्रिय घटना न हो जाये, इससे भयभीत ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया. इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से एक झोपड़ी का निर्माण किया. इसी झोपड़ी में स्कूल का संचालन शुरू हुआ. विगत चार साल से यह स्कूल झोपड़ी में ही चल रहा है. भवन निर्माण की दिशा में कोई पहल नहीं हुई. स्कूल में दो पारा शिक्षिका हैं.
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