शिक्षक की कमी से उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित

Updated at : 13 Feb 2025 11:19 PM (IST)
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शिक्षक की कमी से उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित

पर्याप्त कमरे व विषयवार शिक्षक नहीं, ट्यूशन के भरोसे छात्र

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शिकारीपाड़ा. प्रखंड के आठ मध्य विद्यालयों को पिछले एक दशक में उत्क्रमित कर उच्च विद्यालय दर्जा दिया गया है. पर इन उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में पढ़ाई के लिए शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हो पाया. कुछ स्कूल में तो वर्ग संचालन के लिए पर्याप्त कमरे तक नहीं है. ऐसे उत्क्रमित उच्च विद्यालय संबंधित मध्य विद्यालय के भवन में और उसी के शिक्षक द्वारा संचालित हो रहे हैं. लिहाजा ऐसे उत्क्रमित उच्च विद्यालय में नवमी-दशमी की पढ़ाई भगवान भरोसे ही चल रही है. सिलेबस की पढ़ाई और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना यहां बेमानी ही है. मैट्रिक की परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम सपना. जिन पदाधिकारियों को स्कूल का निरीक्षण करना है, वे नियमित रूप से निरीक्षण करें, तो शैक्षणिक गुणवत्ता, शैक्षणिक परिदृश्य, संसाधनों की उपयोगिता और शिक्षकों के अनुपातिक व्यवस्था पर चिंतन जरूर करते. बेंच-डेस्क रहते दरी पर बिठाकर होती है पढ़ाई उत्क्रमित उच्च विद्यालय हीरापुर में 159 छात्र-छात्राओं का नामांकन है. यहां बेंच-डेस्क और पर्याप्त कमरे रहते हुए बरामद के पर दरी में बिठाकर मास्टर साहब पढाते हैं. बरामदे में उनकी बाइक भी खड़ी रहती है. यहां नियमित शिक्षक हैं, तो दूसरे प्रतिनियुक्त. स्कूल को वर्ष 2016-17 में उत्क्रमित कर उच्च विद्यालय का दर्जा दिया गया था. आठवीं से ऊपर नवमी-दशमी की पढ़ाई शुरू करायी गयी थी, पर शिक्षकों के पदस्थापन नहीं होने से पठन-पाठन प्रभावित होता रहा है. विद्यालय में एकमात्र सरकारी शिक्षक उत्तमकांत झा पदस्थापित है, जो प्रभारी प्रधानाध्यापक की भूमिका में हैं. उधार की व्यवस्था में सहायक अध्यापक जोसेफ सोरेन व सुशीला हेंब्रम को सप्ताह में 3-3 दिन के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है. शिक्षकों की कमी को लेकर 2-3 कक्षा के बच्चों को साथ बैठाकर पढ़ाई की जाती है. पढाई के नाम पर यहां खानापूरी होती है. कहना गलत नहीं होगा. बच्चे विद्यालय में खेलकूद कर तथा एमडीएम का भोजन कर वापस घर चले जाते हैं. कजलादाहा में दो शिक्षक 198 छात्रों का गढ़ रहे भविष्य शिकारीपाड़ा के ही उत्क्रमित उच्च विद्यालय कजलादहा में दो शिक्षकों के द्वारा पहली से दशमी कक्षा तक के 198 छात्र छात्राओं का पठन पाठन कराया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों के विषयवार पूरे सिलेबस की पढ़ाई करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. उत्क्रमित विद्यालय में पहली से पांचवी कक्षा तक 94, छठी से आठवीं तक 95 तथा 9 वी व 10 वी में 09 छात्र-छात्राएं नामांकित है. विद्यालय को वर्ष 2016-17 में उत्क्रमित कर उच्च विद्यालय का दर्जा दिया गया है. उच्च विद्यालय की पढ़ाई शुरू भी करायी गयी है. पर उच्च विद्यालय के लिए न भवन बना और न शिक्षकों की पदस्थापना ही की गयी. विषयवार शिक्षकों की पदस्थापना नहीं होने से बच्चे यहां आठवीं की पढ़ाई करके अन्यत्र चले जा रहे हैं. शिक्षक पंकज कुमार मिश्र व अनुपम दास पदस्थापित है. श्री मिश्रा बताते हैं कि शिक्षकों की कमी से पहली कक्षा से दशमी तक के वर्ग संचालन में परेशानी होती है. ================== नया भवन ढंक गया झाड़ियों से, 150 छात्रों पर पांच शिक्षक हैं गंद्रकपुर में कजलादाहा व हीरापुर से अलग स्थिति यूएचएस गंद्रकपुर की है, जहां विभाग थोड़ा मेहरबान है. यह विद्यालय वित्तीय वर्ष 2013-14 में उत्कमित हुआ था. यहां लाखों की लागत से दो मंजिला भवन भी बनाया गया है. भवन कुछ दिन में खंडहर में भी तब्दील हो जाए, तो अचरज नहीं होगा. एक दशक में उच्च विद्यालय की पढ़ाई के लिए एक ही शिक्षक दिये गये. हालांकि प्रारंभिक कक्षाओं के लिए चार शिक्षक हैं. पुराने मध्य विद्यालय के भवन में ही सभी दस कक्षाओं की पढ़ाई की जाती है. जिससे उच्च विद्यालय के लिए नया भवन वीरान पड़ा रहता है. इस उत्क्रमित उच्च विद्यालय में पहली से 5वी कक्षा तक-79, 6 ठी से 8वी कक्षा तक 47 तथा 9 वी व 10 वी कक्षा में 24 छात्र छात्राएं नामांकित है. इस उत्कमित उच्च विद्यालय में उच्च विद्यालय के लिए एक शिक्षक सुनील उरांव पदस्थापित है. उत्क्रमित मध्य विद्यालय में एक सरकारी शिक्षक संतोष कुमार तथा तीन सहायक अध्यापक रविंद्र कुमार, प्रद्धुत कुमार साहा व सरोजिनी हेंब्रम कार्यरत हैं. फोटो-लाखों की लागत से बनवाया गया भवन, जो पड़ा है बेकार. कोट उच्च विद्यालय में शिक्षक की प्रतिनियुक्ति जिला स्तर से की जाती है. तात्कालिक व्यवस्था के तहत प्रखंड स्तर से उत्क्रमित उच्च विद्यालय हीरापुर में सप्ताह में तीन-तीन दिन के लिए दो सहायक अध्यापक की प्रतिनियुक्ति की गयी है. दूसरे उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में तात्कालिक व्यवस्था के तहत ही सहायक अध्यापकों की प्रतिनियुक्ति की जायेगी. एस्थेर मुर्मू, बीइइओ

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