दुमका के काठीकुंड में ऑटोमैटिक मौसम केंद्र का उद्घाटन, किसानों को मिलेगा लाभ

काठीकुंड का मौसम की जानकारी देने वाला यंत्र (बाएं) और केंद्र का किया गया उद्घाटन. फोटो: प्रभात खबर
Dumka News: दुमका के काठीकुंड में स्वचालित मौसम केंद्र शुरू होने से किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान और फसल सलाह मिलेगी. जलवायु-संवेदनशील खेती को बढ़ावा देने की पहल से किसानों को बेहतर प्रबंधन, जोखिम में कमी और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास और टिकाऊ कृषि को मजबूत करेगा. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
दुमका से अभिषेक कुमार की रिपोर्ट
Dumka News: झारखंड के दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड अंतर्गत पंदनपहाड़ी पंचायत भवन में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर जलवायु-संवेदनशील खेती और स्थानीय विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, पंचायती राज प्रतिनिधियों, किसानों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.
जीपीडीपी समावेशी विकास का मजबूत आधार
कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) के महत्व पर विशेष जोर दिया गया. इसे सहभागी और समावेशी योजना निर्माण का प्रभावी माध्यम बताया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि जीपीडीपी के तहत सिंचाई अवसंरचना और वृक्षारोपण जैसी योजनाओं को जोड़कर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता को मजबूत किया जा सकता है.
तपोवन क्लस्टर मॉडल से ‘बीज से बाजार’ तक मजबूती
इस अवसर पर स्विच ऑन फाउंडेशन द्वारा संचालित तपोवन क्लस्टर के उद्देश्यों को भी विस्तार से समझाया गया. इस पहल का मकसद किसानों को “बीज से बाजार” तक मजबूत बनाना है, ताकि वे मौसम के बदलाव के बावजूद टिकाऊ खेती कर सकें. यह मॉडल किसान समूहों को सशक्त करने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने और बाजार से जुड़ाव बढ़ाने में मदद करता है.
किसानों को बड़ी राहत
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्वचालित मौसम केंद्र का उद्घाटन रहा. इसके साथ ही कृषि परामर्श सेवाओं की भी शुरुआत की गई. अब स्थानीय किसानों को अपने क्षेत्र के अनुसार सटीक मौसम पूर्वानुमान और फसल आधारित सलाह मिल सकेगी. इससे किसान समय पर बुवाई, सिंचाई और कटाई जैसे महत्वपूर्ण निर्णय बेहतर तरीके से ले सकेंगे.
बढ़ेगी किसानों की आय
विशेषज्ञों ने बताया कि इन सेवाओं के जरिए किसान जलवायु जोखिमों को कम कर सकेंगे और फसल प्रबंधन को बेहतर बना पाएंगे. इससे न केवल उत्पादन में सुधार होगा, बल्कि किसानों की आय और लाभ में भी वृद्धि होगी. यह पहल दुमका जिले को जल-सुरक्षित और जलवायु-संवेदनशील कृषि प्रणाली की ओर ले जाने में मददगार साबित होगी.
पंचायत प्रतिनिधियों ने जताई प्रतिबद्धता
कार्यक्रम में पंचायत की मुखिया श्रीमती हेंब्रम ने कहा कि राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस का आयोजन जमीनी स्तर पर बेहतर योजना निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है. उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर ग्रामीण विकास को गति दी जा सकती है.
वैज्ञानिकों ने दी जलवायु-संवेदनशील खेती की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र, दुमका के वैज्ञानिक डॉ. बी.के. मेहता ने कहा कि बदलते मौसम और बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच जलवायु-संवेदनशील खेती को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है. उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक ज्ञान और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य में सुधार और जल प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सकता है.
दुमका में टिकाऊ कृषि प्रणाली की दिशा में कदम
यह कार्यक्रम जलवायु अनुकूल कृषि (सीआरए) सुधार योजना के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य दुमका जिले में टिकाऊ और आय-वर्धक कृषि प्रणाली विकसित करना है. इस पहल से किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है.
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साझा संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी हितधारकों ने विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था को मजबूत करने और जिले में जलवायु-संवेदनशील कृषि पद्धतियों को व्यापक स्तर पर लागू करने का संकल्प लिया. यह पहल न केवल किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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