रानीश्वर. गर्भवती महिलाओं के संस्थागत प्रसव से शिशु व मातृ मृत्यु दर में गिरावट आयी है. एनआरएचएम के तहत वर्ष 2007 से ग्रामीण क्षेत्र में सहियाओं का चयन हुआ था. उसी समय से ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई है. सहियाओं के माध्यम से गांव-गांव में स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम चलाया जा रहा है. सहियाओं के चयन के बाद क्लस्टर स्तर पर सहिया साथी का भी चयन किया गया है. सहियाओं के चयन के बाद से गांवों में गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराने की प्रक्रिया में भी बढ़ोत्तरी हुई है. पहले महिलाओं का घरों में ही प्रसव कराने से शिशु व मातृ मृत्यु दर ज्यादा थी. अधिकांश जागरूक व शिक्षित परिवारों की महिलाओं का ही संस्थागत प्रसव कराया जाता था. संस्थागत प्रसव कराने के बाद से शिशु व मातृ मृत्यु दर में गिरावट आयी है. सीएचसी रानीश्वर से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 तक सिर्फ सीएचसी में ही 274 गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया गया है. अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्र पर महिलाओं काे संस्थागत प्रसव कराने से उन्हें सरकारी स्तर से सुविधाएं भी उपलब्ध करायी जाती है. सूचना मिलने पर गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस या ममता वाहन के माध्यम से अस्पताल तक लाया जाता है. उसके बाद प्रसव के बाद मां को 1400 रुपये बैंक खाते में उपलब्ध कराया जाता है. गर्भवती महिला को अस्पताल तक पहुंचाने वाले सहिया को भी 300 रुपए भुगतान किया जाता है. इससे पहले गर्भधारण के बाद से गर्भवती महिलाओं की अस्पताल में या नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र पर नियमित स्वास्थ्य जांच की जाती है. ब्लाॅक डाटा मैनेजर से मिली जानकारी के अनुसार रानीश्वर के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्र पर प्रति माह 251 गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराने का लक्ष्य निर्धारित है. इनमें से प्रति माह लक्ष्य के अनुसार कमोबेश 240-250 महिलाओं को संस्थागत प्रसव कराने की रिपोर्ट है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ नदियानंद मंडल ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव कराने के लिए सरकारी स्तर बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती है. इसके लिए सहिया, सहिया साथी तथा स्वास्थ्य कर्मी तत्पर रहती है. गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच के अलावा प्रसव के उपरांत 1400 रुपए प्रोत्साहन राशि भी बैंक खाते में उपलब्ध कराया जाता है.
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