भादो पूर्णिमा पर बासुकिनाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी, 55 हजार श्रद्धालुओं ने किया फौजदारीनाथ का जलार्पण, हर-हर महादेव के नारे से गुंजायमान रहा मंदिर परिसर

Updated at : 18 Sep 2024 8:11 PM (IST)
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भादो पूर्णिमा पर बासुकिनाथ मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी, 55 हजार श्रद्धालुओं ने किया फौजदारीनाथ का जलार्पण, हर-हर महादेव के नारे से गुंजायमान रहा मंदिर परिसर

पूर्णिमा पर भक्तों की कतार संस्कार भवन से बाहर निकल कर क्यू कॉम्प्लेक्स होते हुए शिवगंगा तक पहुंची

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बासुकिनाथ. भादो पूर्णिमा के अवसर पर बाबा फौजदारीनाथ दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. सुबह से ही जलार्पण का जो सिलसिला शुरू हुआ वह शाम तक चलते रहा. मंदिर प्रबंधन के अनुसार 55 हजार शिवभक्तों ने भोलेनाथ पर जलार्पण किया. भक्तों ने बाबा फौजदारीनाथ की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना किया. इस अवसर पर दिनभर मंदिर प्रांगण में शंख, ध्वनि घंटा की आवाज से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा. वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पंडितों के द्वारा षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना की गयी. भक्तों ने स्पर्श पूजा कर भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि की कामना की. चार बजे भोर से मंदिर प्रांगण में भक्तों का तांता लगा रहा. सरकारी पूजा के बाद मंदिर गर्भगृह का गेट भक्तों के लिए खोल दिया गया. श्रद्धालुओं ने पवित्र शिवगंगा में आस्था की डुबकी लगाकर बाबा फौजदारीनाथ की पूजा-अर्चना की. पंडित सुधाकर झा ने बताया कि पूर्णिमा के दिन जो भी सच्चे मन और विश्वास के साथ भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. बिहार, बंगाल व झारखंड के विभिन्न जिलों से पहुंचे भक्तों की भीड़ यहां देखी गयी. गर्भगृह गेट पर श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल लगे रहे. पूर्णिमा पर भक्तों ने गर्भगृह में भगवान भोलेनाथ की प्रार्थना की. पूर्णिमा पर भक्तों की कतार संस्कार भवन से बाहर निकल कर क्यू कॉम्प्लेक्स होते हुए शिवगंगा तक पहुंची. संस्कार भवन गेट से भक्तों को मंदिर में प्रवेश कराया गया. कतारबद्ध होकर भक्तों ने भोलेनाथ पर जल पुष्प अर्पित किया. मंदिर निकास गेट पर स्वास्थ्य जांच के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाया गया. मौके पर एसडीपीओ संतोष कुमार, पुलिस निरीक्षक श्यामानंद मंडल आदि मौजूद थे.

पूर्णिमा पर दान, स्नान से मोक्ष की प्राप्ति

बासुकिनाथ. सनातन धर्म में भादो पूर्णिमा का बहुत अधिक महत्व होता है. पूर्णिमा के पावन अवसर पर किये गये दान, नदी तथा किसी पवित्र सरोवर में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस मान्यता से मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं ने ब्राम्हणों को दान पुण्य किया गया. पंडितों ने बताया कि पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. शिवभक्तों ने मंदिर प्रांगण में कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान भी किये. मंदिर प्रांगण में भक्तों ने मुंडन संस्कार भी कराया. सूर्योदय से पूर्व महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने नदी व तालाब में स्नान कर अपने अराध्य देव भगवान की स्तुति कर मोक्ष की मंगलकामना की.

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