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झारखंड में सबसे अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध करा रहा दुमका जिला, जानें कैसे

दुमका जिला पूरे राज्य में सबसे अधिक श्रमिकों को योजना से जोड़ कर रोजगार देने में सफल रहा है. जिले में अभी 6,628 योजनाएं क्रियान्वित हो रही हैं और उसमें 41,358 मजदूर काम कर रहे हैं. योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य में दुमका, पलामू व रांची के बाद तीसरे पायदान पर है, जबकि रोजगार दिलाने में राज्यभर में अव्वल है.

दुमका : दुमका जिला पूरे राज्य में सबसे अधिक श्रमिकों को योजना से जोड़ कर रोजगार देने में सफल रहा है. जिले में अभी 6,628 योजनाएं क्रियान्वित हो रही हैं और उसमें 41,358 मजदूर काम कर रहे हैं. योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य में दुमका, पलामू व रांची के बाद तीसरे पायदान पर है, जबकि रोजगार दिलाने में राज्यभर में अव्वल है. दुमका के सभी 206 पंचायतों में योजनाएं क्रियान्वयित हो रही है. यह भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. समाहरणालय सभागार में मनरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा के क्रम में उपायुक्त राजेश्वरी बी ने यह जानकारी दी.

उपायुक्त राजेश्वरी बी ने कहा कि दुमका जिला पूरे राज्य में सबसे अधिक श्रमिकों को रोजगार देने में सफल रहा है. उन्होंने लक्ष्य से पीछे चल रहे 50 खराब पंचायतों के रोजगार सेवकों व संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में ऐसा कोई गांव नहीं रहे, जिसमें मनरेगा से योजनाएं संचालित नहीं हो.

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उन्होंने गांववार संचालित योजनाओं की सूची बनाने एवं जिस गांव में योजना संचालित नहीं हो पायी है, उस गांव में अविलंब योजना संचालित कर श्रमिकों को काम देने का निर्देश दिया. बैठक के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि मनरेगा से संचालित योजना में जेसीबी (JSB) का प्रयोग नहीं हो इसे सुनिश्चित करें एवं जिस पंचायत या गांव में संचालित योजना में जेसीबी संचालन का प्रमाण मिलेगा संबंधित रोजगार सेवक,पंचायत सेवक एवं अन्य दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किये गये बिरसा हरित ग्राम योजना, नीलांबर- पीतांबर जल समृद्धि योजना एवं शहीद पोटो हो खेल विकास योजना की समीक्षा की एवं संचालित योजनाओं को धरातल पर उतारने को लेकर निर्देशित किया. वहीं, सभी मुखिया को मनरेगा के तहत अपने पंचायत क्षेत्र में नाला जीर्णोद्धार योजना शुरू कराने समेत मनरेगा से पलायन रोकने, श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध करवाने समेत अन्य कई दिशानिर्देश दिये. बैठक में प्रधानमंत्री आवास की समीक्षा भी की गयी.

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उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के कार्यो की समीक्षा कर सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया. इस दौरान उपायुक्त ने जिले को वित्तीय वर्ष 2020-21 में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार वरीयता क्रम को देखते हुए सुयोग्य लाभुकों का निबंधन करने एवं जिओ टेगिंग करने का निर्देश दिया.

उपायुक्त ने कहा कि विभिन्न चरणों में लंबित कार्यों को पूरा कर किश्त राशि का भुगतान करें. आवास निर्माण में आ रही अड़चनों को दूर करें. आवास निर्माण शुरू कराने के लिए लाभुकों को प्रेरित करें और भूमि विवादों को अंचल अधिकारियों द्वारा सत्यापन कर सुलझाएं. कई पंचायत में लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं पाये जाने पर उपायुक्त ने नाराजगी जाहिर करते हुए रोजगार सेवक को स्पष्टीकरण देने को कहा.

उपायुक्त ने मनरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के संचालन को लेकर अन्य कई दिशानिर्देश दिये. बैठक में उप विकास आयुक्त शेखर जमुआर, प्रशिक्षु आइएएस अभिजीत सिन्हा, प्रशिक्षु आइएएस दीपक कुमार दुबे, आइटीडीए निदेशक राजेश कुमार राय, अपर समाहर्ता सुनील कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार, जिला आपूर्ति पदाधिकारी अल्बर्ट बिलुंग, जिला परिवहन पदाधिकारी विनय मनीष लकड़ा, जिला योजना पदाधिकारी अरुण कुमार द्विवेदी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, बीपीओ, रोजगार सेवक उपस्थित थे.

Posted By : Samir ranjan.

Prabhat Khabar Digital Desk
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