आदिवासी समाज की हासा-भाषा व धर्म-संस्कृति खतरे में : सोनाराम

Updated at : 01 Apr 2025 5:19 PM (IST)
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आदिवासी समाज की हासा-भाषा व धर्म-संस्कृति खतरे में : सोनाराम

संताल परगना में संताली भाषा के लिए लिपि डिबेट से ऊपर उठकर संताली को राजभाषा बनाने के लिए आंदोलन का लिया निर्णय

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आदिवासी सेंगेल अभियान का प्रमंडलस्तरीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण दुमका परिसदन में संपन्न संवाददाता, दुमका आदिवासी सेंगेल अभियान का प्रमंडलस्तरीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण दुमका परिसदन में आयोजित किया गया. अध्यक्षता दुमका जोनल हेड बर्नाड हांसदा ने की. संचालन प्रमंडलीय अध्यक्ष कमिश्नर मुर्मू ने किया. सेंगेल दिसोम परगना सोनाराम सोरेन ने कहा कि आज आदिवासी समाज का अस्तित्व खतरे में है. आदिवासियों की हासा-भाषा, जाति, सरना धर्म, मरांग बुरू आदि लूट रहे हैं. आदिवासी रिजर्व सीट से चुनाव जीतने वाले एमपी-एमएलए ही नहीं मुखिया, जिला परिषद आदि जनप्रतिनिधि एवं आदिवासी गांव-समाज के अगुआ मांझी बाबा भी इसे बचाने में अक्षम हैं. मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ही आदिवासियों को बचाने के लिए बात करते हैं. इन्हीं के नेतृत्व में सीएनटी-एसपीटी एक्ट को सख्ती से लागू करने, आदिवासी बहुल प्रदेश झारखंड में राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संताली भाषा को प्रथम राजभाषा बनाने, देश में लगभग 15 करोड़ प्रकृति पूजक आदिवासियों को सरना धर्म कोड दिलाने व गिरिडीह के पारसनाथ स्थित आदिवासियों के मरांग बुरू को कब्जे से मुक्त करने का संघर्ष जारी है. मालदा जोनल हेड मोहन हांसदा ने कहा कि आदिवासी गांव समाज में सुधार के लिए वंशवादी मांझी परगना व्यवस्था में संवैधानिक जनतंत्रीकरण जरूरी है. तभी आदिवासी समाज से नशापान, अंधविश्वास, वोट की खरीद बिक्री समाप्त की जा सकती है. केंद्रीय संयोजक लक्खी नारायण किस्कू ने कहा कि आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ही अब तक सीएनटी-एसपीटी कानून को बचाया है, उनके संघर्ष से ही 22 दिसंबर 2003 को संताली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करवाया जा सका है. सिदो मुर्मू कान्हू मुर्मू डाक टिकट जारी करवाया है. पेशा कानून के तहत पंचायत चुनाव कराया है. आज इन्हीं के नेतृत्व में आदिवासी समाज को बचाया जा सकता है. संताल परगना में संताली भाषा के लिए लिपि डिबेट से ऊपर उठकर संताली को राजभाषा बनाने के लिए आंदोलन करना होगा. बैठक में साहिबगंज जोनल संयोजक सनातन हेंब्रम, प्रमंडलीय सचिव गोपाल सोरेन, दुमका जिलाध्यक्ष सुनील मुर्मू, जामताड़ा जिलाध्यक्ष सुरेश सोरेन, देवघर जिलाध्यक्ष राजेंद्र सोरेन, गोड्डा जिलाध्यक्ष सोनोती किस्कू, पाकुड़ जिलाध्यक्ष लुबीन मरांडी, संतलाल मुर्मू, मंजू मुर्मू , विनोद मुर्मू आदि शामिल थे.

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