सोहराय में दिखा संताल आदिवासियों की प्रकृति और परंपरा से जुड़ाव संवाददाता, दुमका दुमका के एलआइसी कॉलोनी स्थित सारजोम बेड़ा क्लब द्वारा आयोजित सोहराय मिलन समारोह उस समय खास बन गया, जब नॉर्वे से आये विदेशी मेहमान भी संताल आदिवासियों की पारंपरिक व संस्कृति के रंग में पूरी तरह रंग गये. मांदर की गूंजती थाप, पारंपरिक गीतों की मिठास और सामूहिक नृत्य की लय में विदेशी मेहमान खुद को रोक नहीं पाये और संताली परिधान धारण कर नृत्य में शामिल हो गये. समारोह में मुख्य अतिथि जामा विधायक डॉ लोइस मरांडी उपस्थित रहीं. उन्होंने विदेशी मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि सोहराय केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संताल समाज का प्रकृति, पशुधन और जीवन के प्रति सम्मान का प्रतीक है. आयोजकों ने संताल समाज की सभ्यता, संस्कृति और जीवन दर्शन से परिचित कराने के उद्देश्य से विदेशी मेहमानों को आमंत्रित किया गया था. नृत्य और गीतों के माध्यम से उन्हें बताया गया कि कैसे संताल आदिवासी समाज जंगल, नदी, पहाड़ और पशुओं के साथ अपने जीवन को जोड़कर देखते हैं. नॉर्वे से आये मेहमानों ने संताल समाज की परंपराओं, प्रकृति प्रेम और सामूहिकता की भावना की मुक्तकंठ से सराहना की. इसे दिल को छू लेने वाला अनुभव बताया. कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियों ने आकर्षक संताली नृत्य प्रस्तुत किया. मांदर और तमाक की थाप पर पूरा माहौल आदिवासी संस्कृति से सराबोर हो गया. आयोजन को सफल बनाने में क्लब संरक्षक मार्टिन किस्कू, अध्यक्ष ब्रह्मदेव, उपाध्यक्ष पीटर बाप्पी सोरेन, सचिव राजेश सोरेन, कोषाध्यक्ष अमर हेंब्रम, ग्लैडसन सोरेन, मीडिया प्रभारी जुनस मरांडी समेत छूटुन, पप्पू, सन्नी, बीरेंद्र, राकेश, विकास, संजीत, ताबू, मामा, राजू, विष्णु, रवि, फूलचंद, सितकुमार, ज्योतिष आदि सभी सदस्यों की अहम भूमिका रही.
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