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सहारा में 18 वर्षों बाद कोल्ड स्टोरेज भवन अधूरा

Updated at : 03 Dec 2024 11:59 PM (IST)
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सहारा में 18 वर्षों बाद कोल्ड स्टोरेज भवन अधूरा

कोल्ड स्टोरेज नहीं होने से बर्बाद होती हैं इलाके की 40 प्रतिशत सब्जियां

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बासुकिनाथ. झारखंड सरकार किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में अनेक योजनाएं चला रही है. किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कोल्ड स्टोरेज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. ऐसे में जरमुंडी प्रखंड सहारा बाजार के पास 18 वर्ष बाद भी कोल्ड स्टोरेज भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है. भवन बेकार पड़ा है. स्टोरेज की समस्या के कारण किसान कम कीमत पर ही सब्जी बेचने को मजबूर हैं. सरकार के लाखों रुपये यहां बर्बाद हो गये. बावजूद इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पायी. यहां के किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. किसानों को लाभ पहुंचाने को लेकर 5 अगस्त 2006 को तत्कालीन मंत्री जलेश्वर महतो व हरिनारायण राय ने शीतगृह का शिलान्यास किया था. किसानों को तो लाभ मिलना दूर भवनों के दीवारों पर अब घास ऊग आये हैं. प्रखंड के अधिकांश लोग कृषि पर आधारित हैं. कोल्ड स्टोरेज नहीं रहने से किसानों को लागत मूल्य भी नहीं निकल पाता है. उदासीनता के कारण भवन अब तक अधूरा है. बर्बाद हो जाते हैं लाखों रुपये के आलू और प्याज प्रखंड क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होने के कारण किसानों को 40 प्रतिशत से ज्यादा सब्जियां बर्बाद हो जाती है. ऐसे में बड़ी मात्रा में उत्पादन के बावजूद किसान या तो सस्ती दर पर उपज बेचते हैं. या फिर मुनाफा न मिलने पर अपने उपज बर्बाद कर देते हैं. याद हो कि विधायक बादल पत्रलेख के कृषि मंत्री बनने के बाद कोल्ड स्टोरेज का अधूरा काम पूरा होने का आस जगी थी पर उसके स्तर से पहल नहीं हो पायी है. लाखों के आलू और प्याज बर्बाद हो जाते हैं. तकरीबन 40 प्रतिशत सब्जी बर्बाद हो जाती है. आय बढ़ाने की उम्मीद को लेकर प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ों किसान नकदी फसल के रूप में आलू, प्याज वह हरी सब्जी की खेती करते हैं. शीतगृह के अभाव में लाखों रुपये के आलू और प्याज बर्बाद हो जाते हैं. हरी सब्जी सड़ गल कर नष्ट हो जाती है, या फिर उसे कम कीमत पर बेचना पड़ता है. इससे किसानों को आय बढ़ाने की उम्मीदें खत्म हो जाती है. एक और जहां सरकार द्वारा किसानों को आय बढ़ाने को लेकर कई योजनाएं चलायी जा रही है, वहीं दूसरी ओर आलू प्याज हरी सब्जियां आम आदि की सुरक्षा को लेकर अब तक प्रखंड में प्रतिवर्ष हजारों क्विंटल टमाटर, आलू, प्याज, आम, हरी सब्जी आदि नष्ट हो जाती है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. अब 8.75 करोड़ से 5000 एमटी क्षमता का बन रहा नया कोल्ड स्टोरेज भवन 8.75 करोड़ से 5000 एमटी क्षमता का नया कोल्ड स्टोरेज का निर्माण राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड झारखंड सरकार के द्वारा कराया जा रहा है. कृषि, पशुपालन सहकारिता विभाग के द्वारा जरमुंडी प्रखंड कुशमाहा चिकनियां गांव के पास 8.75 करोड़ की लागत से 5000 एमटी क्षमता वाला नया कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कार्य किया जा रहा है. रंग-रोगन का काम चल रहा है. बताया नया साल 2025 में जरमुंडी प्रखंड में पांच हजार मिलियन टन (एमटी) क्षमता का कोल्ड स्टोरेज बनकर तैयार हो जायेगा. 22 सितंबर 2021 को कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने शिलान्यास किया था. किसान सब्जियां, फल आदि रख सकेंगे. वहीं व्यापारियों को भी इसका लाभ मिलेगा. सरकार द्वारा निर्धारित दर पर यहां अपना माल रख सकेंगे. हजारों किसानों को इससे होगा लाभ. वहीं बिचौलिये से भी छुटकारा मिल जायेगा. फसल को औने-पौने दाम में नहीं बेचना पड़ सकेगा. क्या कहते हैं किसान जरमुंडी में कोल्ड स्टोरेज की मांग बहुत पुरानी है. बनने पर किसानों को लाभ मिलेगा, किसानों द्वारा उत्पादित फसलों को सुरक्षित रख सकेंगे. नया शीतगृह से लाभ मिलेगा. आनंद गोपाल सहारा में अधूरा कोल्ड स्टोरेज में सरकार का पैसा बर्बाद हुआ. किसान नया कोल्ड स्टोरेज में अपने उत्पादित साग सब्जियों का रखरखाव कर पायेंगे.जल्द चालू होने की पहल होनी चाहिए. मणिकांत प्रखंड क्षेत्र में बहुतायत मात्रा में साग सब्जियों की खेती होती है. कोल्ड स्टोरेज नहीं रहने के कारण बर्बाद हो जाती है. मजबूरन बिचौलियों को औने-पौने कीमत पर ही बेचना पड़ता है. रामवृक्ष साह नया कोल्ड स्टोरेज बन रहा है. कब चालू होगा पता नहीं. कोल्ड स्टोर उपलब्ध होने के बाद किसानों को समस्या से छुटकारा प्राप्त हो जायेगा. जल्द चालू करने की पहल होनी चाहिए. जितेंद्र मंडल

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