बासुकिनाथ. माघ माह के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी तिथि पर बुधवार को सुख, समृद्धि और उत्साह का पर्व मकर संक्रांति स्नान, ध्यान और दान के साथ मनाया गया. मकर संक्रांति के अवसर पर तिल का भोग लगाकर भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गयी. तिल से बने पकवानों का विशेष भोग लगाया गया. मकर संक्रांति पावन पर्व पर बाबा फौजदारीनाथ को तिल, दही, गुड़ का भोग लगाया गया. सुबह नदी-तालाबों में स्नान करके भगवान सूर्य को अर्ध्य देने की परंपरा निभायी गयी. क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. मंदिर प्रबंधन के अनुसार करीब 55 हजार भक्तों ने फौजदारी बाबा की पूजा-अर्चना की. साढ़े चार बजे भोर मंदिर का पट खुला. सरकारी पुरोहित पूजा के बाद मंदिर का पट भक्तों के लिए खोल दिया गया. शिवभक्तों ने तिल, गुड़ व अक्षत का भोग लगाकर मकर संक्रांति पर्व मनाया. हजारों की संख्या में शिवभक्तों ने बाबा फौजदारीनाथ की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की. परंपरागत तरीके से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर गर्भगृह में पुजारी सदाशिव पंडा द्वारा भोग लगाया गया. बताया कि सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश किया. उत्तरायण सूर्य का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन से दिन बढ़ता है और रात का समय घटते चला जाता है. मकर संक्रांति पर्व पर बाबा फौजदारीनाथ दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. पवित्र शिवगंगा में सूर्योदय से पूर्व भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाकर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की. पंडित सुधाकर झा ने बताया कि इस दिन तिल का दान और सेवन करने से भगवान सूर्य के साथ-साथ शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है, क्योंकि माना जाता है कि सूर्यदेव मकर संक्रांति पर अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं. पुलिस व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं ने मंदिर गर्भगृह में दर्शन पूजन किये. मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है और खरमास समाप्ति के साथ ही सभी तरह के शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है. वहीं मंदिर कार्यालय से अधिकारी व मंदिर कर्मियों ने मंदिर गतिविधियों पर नजर बनाये रखा.
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