आपदा प्रबंधन में सबका सहयोग आवश्यक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Mar 2017 6:16 AM (IST)
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मंथन आपदा प्रबंधन को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन, आयुक्त ने कहा दुमका : आपदा के दौरान नुकसान को कम करने के लिए राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. ये बातें प्रमंडलीय आयुक्त दिनेश चन्द्र मिश्र ने कही. आपदा प्रबंधन से दो दिवसीय कार्यशाला के उदघाटन […]
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मंथन आपदा प्रबंधन को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन, आयुक्त ने कहा
दुमका : आपदा के दौरान नुकसान को कम करने के लिए राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. ये बातें प्रमंडलीय आयुक्त दिनेश चन्द्र मिश्र ने कही.
आपदा प्रबंधन से दो दिवसीय कार्यशाला के उदघाटन के बाद आयुक्त दिनेश चंद्र मिश्र ने प्रतिभागियो को संबोधित करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए़ कार्यशाला का उद्देश्य आपदा प्रबंधन कार्ययोजना को समयबद्ध तरीके से तैयार करना होगा, ताकि आपदा जोखिम न्यूनतम हो सके. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में व्यापक रूप से जलवायु परिवर्तन हो रहा है. जिसके कारण किसान जहां सुखाड़ की चपेट में आ रहे है,
आमजन बारिश के लिए त्राहिमाम करते है, मौसम का मिजाज एकाएक बदलना आदि इसी के लक्षण है. कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए आयुक्त के सचिव अंजनी कुमार दुबे, कार्तिक कुमार प्रभात, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राजू महतो एवं राजीव रंजन, डॉ प्रवीण कुमार, सिविल सर्जन गोड्डा, शिव नारायण यादव आदि ने अपने विचार प्रकट किये़
इन्टर एजेंसी ग्रुप के संयोजक सुबीर कुमार ने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं कार्य योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि विभिन्न विभागों की भूमिका एवं सहभागिता से आपदा प्रबंधन को अच्छे तरीके से कार्यान्वित किया जा सकता है़ आयोजित कार्यशाला के माध्यम से आपदा प्रबंधन के सलाहकार एवं पदाधिकारी ने प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के आपदा से बचने के उपाय बताये.
दी जानकी फाउंडेशन के संस्थापक आशीष कुमार ने बताया कि राज्य की 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर अधारित है. कृषि सूखे का मानव जीवन व अन्य जीवों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है. राज्य के लगभग 68 प्रतिशत भू भाग में कहीं कम तो कहीं अधिक मात्रा में सूखे का असर रहता है. इस क्षेत्र के 35 प्रतिशत भाग में 750 मिमी से 1125 मिमी तक ही वर्षा होती है अत: इसे स्थाई सूखाग्रस्त क्षेत्र माना जा सकता है. अत: झारखंड में महिला एवं शिशु केंद्रित एवं जलवायु केंद्रित आपदा प्रबंधन पर रोडमैप तैयार करना एवं उसका अनुपालन करना अति आवश्यक है़ जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के राजू महतो एवं राजीव रंजन ने आपदा के दौरान पशुधन की रक्षा के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया़ इस कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों के संचालन राज्य से आये वरिष्ठ सलाहकार कुशल मुखर्जी, शर्ली फिलिप ने किया़ इस कार्यशाला में सरकारी विभाग के अलावा स्वयं सेवी संस्थाओं से कृष्णा बदलाव फाउन्डेशन, लोकप्रेरणा देवघर, ग्र्राम ज्योति, प्रवाह, लाहान्ती के जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार को रखते हुए इस कार्यशाला में भाग लिया.
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