गोलियों से नहीं दबा सकते आवाज

Published at :27 Oct 2016 8:29 AM (IST)
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गोलियों से नहीं दबा सकते आवाज

दुमका में झाविमो के महाधरना में नीतीश हुए शािमल, कहा संजीत मंडल दुमका : उपराजधानी दुमका के गांधी मैदान में आयोजित झारखंड के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में झाविमो के दो दिवसीय महाधरना के अंतिम दिन बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने लोगों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि झारखंड आज जिस रास्ते […]

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दुमका में झाविमो के महाधरना में नीतीश हुए शािमल, कहा
संजीत मंडल
दुमका : उपराजधानी दुमका के गांधी मैदान में आयोजित झारखंड के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में झाविमो के दो दिवसीय महाधरना के अंतिम दिन बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने लोगों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि झारखंड आज जिस रास्ते पर जा रहा है, उसे देख कर व सुन कर पीड़ा होती है, चिंता होती है. क्या इसी दिन के लिए झारखंड अलग हुआ था कि यहां के आदिवासी व मूलवासियों के हितों की रक्षा भी न हो सके. भाजपा सरकार की नीतियों के कारण झारखंड के लोगों के मन में आक्रोश पैदा हो रहा है.
कोई आवाज उठाता है, तो सरकार गोलियां चलवाती है. सरकार को लोगों की बात सुननी चाहिए, क्योंकि अब जनता जग गयी है. कोई रोकने से रुकने वाला नहीं है. ये आदिवासियों-मूलवासियों के दिल की आवाज है. गोलियों से यह आवाज रुकने वाली नहीं है.
आंदोलन को समर्थन देने आये हैं : जितनी दौलत प्रकृति ने झारखंड को दी है, उतनी कहीं नहीं है. यहां के आदिवासी-मूलवासी काफी मेहनती और ईमानदार हैं. मेहनत के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन भाजपा की सरकार उनके हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है.
जब तक इन आदिवासी-मूलवासी के मूल हितों की रक्षा नहीं होगी, विकास संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि इनके हितों की कीमत पर विकास मंजूर नहीं है. इसलिए बाबूलाल मरांडी ने इनके हितों की रक्षा और झारखंड को बचाने के लिए जो आंदोलन तेज किया है, वह उसका समर्थन करने आये हैं.
देश में कहीं भी किसी को रहने का हक : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा : देश में कहीं भी किसी को रहने का अधिकार है. आदिवासी-मूलवासी के मूल हितों की रक्षा हो, इसका मतलब यह नहीं है कि वे झारखंड में रह रहे अन्य लोगों के खिलाफ हैं. जो झारखंड में बस गये हैं, उनका भी उतना ही अधिकार है. जिन आदिवासी-मूलवासियों का अधिकार जल, जंगल और जमीन पर है, उसे छीनने का हक किसी को नहीं है. लोगों की सहमति के बिना जमीन लेने पर सरकार आमादा है.
सरकार किसानों, आदिवासियों व मूलवासियों से टक्कर ले रही है और गले मिल रही है कॉरपोरेट घरानों से.
चंद उद्योग लग जाने से विकास नहीं : उन्होंने कहा कि एसपीटी-सीएनटी एक्ट में संशोधन कर सरकार चंद औद्योगिक घरानों को लाभ पहुंचाना चाहती है. सिर्फ चंद उद्योग लग जाने को विकास नहीं कह सकते. घर-घर तक विकास की किरण पहुंचानी होगी. सीएम नीतीश ने कहा कि हम सिर्फ विकास की नहीं, न्याय के साथ विकास की बात करते हैं. सबको साथ लेकर विकास हो, लेकिन झारखंड में कुछ अलग ही हो रहा है. किसी भी कीमत पर एसपीटी-सीएनटी एक्ट में छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए.
पहाड़ की रक्षा भी नहीं कर पा रही सरकार
सीएम नीतीश ने कहा : संताल परगना का इलाका राजमहल की पहाड़ियों का इलाका है. यहां बेशकीमती पत्थर हैं. इसका भी सौदा सरकार कर रही है. पहाड़ तक की रक्षा यह सरकार नहीं कर पा रही है. पर्यावरण के सबसे बड़े मित्र आदिवासी ही हैं.
लोगों की आवाज बन चुके हैं बाबूलाल
उन्होंने पूर्व सीएम व झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी की तारीफ करते हुए कहा कि जिस तरह से वे लोगों की समस्या को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं. कोई मसला होता है झारखंड हित में वे आंदोलन कर रहे हैं. लोगों की आवाज बन चुके हैं. और अब उन्हें कोई नहीं रोक सकेगा. उन्होंने कहा कि मरांडी जी के नेतृत्व में ही झारखंड नंबर-वन राज्य बनेगा.
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