नियम बदला तो आलू-टमाटर की तरह बिक जायेगी आदिवासियों की जमीन

Published at :07 Oct 2016 6:40 AM (IST)
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नियम बदला तो आलू-टमाटर की तरह बिक जायेगी आदिवासियों की जमीन

दुमका : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा है कि एसपीटी और सीएनटी एक्ट में संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है. ये दोनों ही कानून ऐतिहासिक हैं. दोनों ही कानून तब बनाये गये, जब जमीन संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन हुआ. सिदो-कान्हू के आंदोलन की वजह से एसपीटी एक्ट बना […]

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दुमका : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा है कि एसपीटी और सीएनटी एक्ट में संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है. ये दोनों ही कानून ऐतिहासिक हैं. दोनों ही कानून तब बनाये गये, जब जमीन संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन हुआ. सिदो-कान्हू के आंदोलन की वजह से एसपीटी एक्ट बना तो बिरसा मुंडा के संघर्ष की बदौलत सीएनटी एक्ट. आदिवासियों के लिए एक ही संपत्ति है और वह है जमीन. ऐसे में जमीन संबंधी इन कानूनों में किसी तरह का खिलवाड़ नहीं होनी चाहिए. कानून बदले, तो आलू-टमाटर की तरह जमीन बिकने लगेगी.

नियम बदला तो आलू-टमाटर…
दुमका परिसदन में मीडिया से बातचीत में डॉ उरांव ने कहा कि भारत सरकार से आयोग को आर्डिनेंस की कॉपी उन्हें मिली थी, जिस पर उन्होंने अपना मंतव्य दिया है कि इन कानूनों में बदलाव नहीं लाया जाना चाहिए.
शिक्षित पहाड़िया की सीधी नियुक्ति की हो पहल : डॉ उरांव ने कहा कि केंद्र सरकार की नीति है कि आदिम जनजाति वर्ग के लोग प्रतियोगिता परीक्षा से गुजरकर नौकरी नहीं हासिल कर सकते. ऐसे में इस वर्ग के मैट्रिक, इंटर व स्नातक उत्तीर्ण पहाड़ियाओं को सीधी नियुक्ति का लाभ दिया जाना चाहिए. इस नीति पर राज्य सरकारों ने पहल तो की, पर केवल उदाहरण पेश करने के लिए. उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे प्रदेश में इस योजना को सही ढंग से लागू नहीं किया जाना विडंबना ही है.
उन्होंने कहा कि इस समाज के युवा पढ़-लिखकर भटक रहे हैं. डॉ उरांव ने राज्य सरकार से अपील भी कि कि वे सर्वे कराकर ऐसे सभी मैट्रिक इंटर व स्नातक पास उम्मीद‍वारों को सीधी नौकरी प्रदान करायें.
कहा, एसपीटी-सीएनटी ऐतिहासिक कानून, नहीं होनी चाहिए कोई खिलवाड़
ग्रामीण क्षेत्र में पहुंच कर पहाड़िया की स्थिति का लिया जायजा
आज करेंगे आला प्रशासनिक अधिकारियों के संग महत्वपूर्ण बैठक
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