नियम बदला तो आलू-टमाटर की तरह बिक जायेगी आदिवासियों की जमीन

दुमका : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा है कि एसपीटी और सीएनटी एक्ट में संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है. ये दोनों ही कानून ऐतिहासिक हैं. दोनों ही कानून तब बनाये गये, जब जमीन संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन हुआ. सिदो-कान्हू के आंदोलन की वजह से एसपीटी एक्ट बना […]
दुमका : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा है कि एसपीटी और सीएनटी एक्ट में संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है. ये दोनों ही कानून ऐतिहासिक हैं. दोनों ही कानून तब बनाये गये, जब जमीन संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन हुआ. सिदो-कान्हू के आंदोलन की वजह से एसपीटी एक्ट बना तो बिरसा मुंडा के संघर्ष की बदौलत सीएनटी एक्ट. आदिवासियों के लिए एक ही संपत्ति है और वह है जमीन. ऐसे में जमीन संबंधी इन कानूनों में किसी तरह का खिलवाड़ नहीं होनी चाहिए. कानून बदले, तो आलू-टमाटर की तरह जमीन बिकने लगेगी.
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