बाबूलाल मरांडी के बेटे व CRPF के सहायक कमांडेंट की हत्या में शामिल कुख्यात नक्सली सिदो कोड़ा की मौत

By Prabhat Khabar Digital Desk
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दुमका/जमुई : झारखंड के दुमका जिला से गिरफ्तार हार्डकोर नक्सली सिदो कोड़ा की बिहार के जमुई सदर अस्पताल में मौत हो गयी. उसे 22 फरवरी को बिहार-झारखंड पुलिस व एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उसने जंगल में पुलिस से पेट व छाती में दर्द की शिकायत की. पुलिस उसे लेकर जमुई सदर अस्पताल गयी, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया. झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के बेटे की हत्या के साथ ही सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट हीरा झा की हत्या में भी वह शामिल था.

बाबूलाल मरांडी के बेटे व CRPF के सहायक कमांडेंट की हत्या में शामिल कुख्यात नक्सली सिदो कोड़ा की मौत

जानकारी के अनुसार, सिदो कोड़ा लेवी वसूलने के लिए झारखंड के दुमका गया हुआ था. इसकी सूचना पुलिस को मिली और घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया. आधिकारिक रूप से गिरफ्तारी व मौत की पुष्टि देर रात की गयी. जमुई पुलिस ने देर रात बताया कि भाकपा माओवादी के शीर्ष जोनल कमांडर सिदो कोड़ा को दुमका से गिरफ्तार किया गया.

गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान), जमुई के नेतृत्व में एसटीएफ बल द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया. सिदो कोड़ा की सूचना पर दो सक्रिय नक्सली इलियास हेम्ब्रम (सा- घुटिया, चकाई, जिला -जमुई) तथा सुशील हांसदा (चरकापत्थर, थाना चंद्रमंडी) को गिरफ्तार किया गया.

इनके पास से पुलिस की लूटी हुई एक एके-47, एक इंसास राइफल, एक पुलिस राइफल, एके-47 की 112 गोलियां, इंसास की 16 गोलियां, 303 की 11 गोलियां, एक हैंड ग्रेनेड, एक पिट्ठू, नक्सली साहित्य, दवा तथा दैनिक उपयोग की वस्तुएं जब्त की गयीं. अभियान के दौरान पूछताछ में सिदो कोड़ा ने बताया था कि पुलिस से लूटे गये दो राइफल, इंसास, विस्फोटक व अन्य सामग्री राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में उपयोग किये जाते हैं.

नाटकीय तरीके से दुमका से पकड़ाया सिदो

एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि नक्सली सिदो कोड़ा लेवी वसूलने के लिए दुमका पहुंचा है. इसी सूचना के आधार पर दुमका पुलिस के सहयोग से छापेमारी की गयी और सिदो को दबोच लिया गया. पुलिस ने तीन दिन पहले जिले के झाझा थाना क्षेत्र से एक नक्सली को गिरफ्तार किया था.

इसकी निशानदेही पर सिदो कोड़ा को पकड़ने की योजना बनायी जा रही थी, जिसके बाद ही यह कार्रवाई की गयी. बड़े ही नाटकीय तरीके से उसे दुमका से गिरफ्तार किया गया. बताया जाता है कि लेवी की रकम वसूलने के लिए उसने सुरक्षित ठिकाने के रूप में दुमका को चुना था, पर पुलिस के बिछाये जाल में फंस गया.

22 साल तक था आतंक का पर्याय

सिदो कोड़ा लगातार 22 साल तक आतंक का पर्याय बना रहा. 1998 में लोकसभा चुनाव के दौरान खैरा प्रखंड क्षेत्र के दीपाकरहर गांव में एक ट्रैक्टर को विस्फोट करके उड़ा दिया था. इस घटना में मतदानकर्मियों सहित पुलिसकर्मी की मौत हुई थी. उत्तरी झारखंड व दक्षिण पूर्व बिहार के जोनल कमांडर चिराग दा के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद सिदो कोड़ा पर बड़ी जिम्मेदारी आ गयी थी. उसने कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया.

नक्सलवाद के रास्ते तो वह दो दशक पूर्व ही चल चुका था, लेकिन लगभग एक दशक से इस इलाके में काफी सक्रिय था. अगस्त, 2009 में सोनो चौक पर पुलिस गश्ती पार्टी पर हमला कर पांच पुलिसकर्मियों की हत्या करने व उनके हथियार लूटने की बड़ी घटना में सिदो शामिल था. इतना ही नहीं, बलथर पुल से 11 मजदूर का अपहरण करने समेत कई अन्य नक्सली घटनाओं को उसने अंजाम दिया.

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