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दुमका में ग्लाइडर क्रैश, इंजीनियर की मौत

Updated at : 03 Feb 2020 11:56 PM (IST)
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दुमका में ग्लाइडर क्रैश, इंजीनियर की मौत

दुमका : दुमका दौरे के क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को दुमका एयरपोर्ट पहुंचे. वहां खड़े ग्लाइडर का उन्होंने निरीक्षण किया. इस क्रम में पायलट ने उन्हें ग्लाइडर में उड़ान भरने की पेशकश भी की, जिसे मुख्यमंत्री ने विनम्रता के साथ नकार दिया. उनके एयरपोर्ट से निकलने के ठीक डेढ़ घंटे बाद वहीं से […]

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दुमका : दुमका दौरे के क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को दुमका एयरपोर्ट पहुंचे. वहां खड़े ग्लाइडर का उन्होंने निरीक्षण किया. इस क्रम में पायलट ने उन्हें ग्लाइडर में उड़ान भरने की पेशकश भी की, जिसे मुख्यमंत्री ने विनम्रता के साथ नकार दिया. उनके एयरपोर्ट से निकलने के ठीक डेढ़ घंटे बाद वहीं से उड़ान भरा एक ग्लाइडर दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

इस हादसे में तकनीशियन (एएमइ) धर्मेंद्र कुमार की मौत हो गयी. वहीं पायलट जेपी सिंह गंभीर रूप से घायल हैं. दुर्घटनाग्रस्त ग्लाइडर बिना मोटर का था. इसका इस्तेमाल प्रशिक्षण आदि के कार्य में किया जाता है. दुमका मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद जेपी सिंह को दुर्गापुर रेफर कर दिया गया है. घटना सोमवार शाम करीब पांच बजे की है.

हादसे से पहले रांची लौटने के क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिन के करीब 3.30 बजे एयरपोर्ट का अवलोकन किया था. उन्होंने ग्लाइडर के बारे में जानकारी भी ली थी.

बिना इंजनवाला ग्लाइडर था, ट्रेनिंग में होता था इस्तेमाल : चीफ पायलट

चीफ पायलट कैप्टन एसपी सिन्हा ने बताया कि जो ग्लाइडर दुर्घटनाग्रस्त हुआ है, वह बिना इंजन का था. उसे ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था. मुख्यमंत्री ने मोटर ग्लाइडर का निरीक्षण किया था. उनके साथ ही मैं रांची लौट आया था. इसके कुछ घंटे बाद पता चला कि दुमका में ग्लाइडर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. एक इंजीनियर की मौत हो गयी है. पायलट घायल है . विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर डीजीसीए की टीम आकर जांच करती है. मंगलवार को संभवत: टीम आयेगी. मैं अभी दुमका जा रहा हूं. वहां जाने के बाद ही पता चलेगा कि दुर्घटना कैसे हुई.

वर्ष 1997 से ग्लाइडर है सरकार के पास

संयुक्त बिहार में ही इंजन रहित यह ग्लाइडर वर्ष 1997 में लिया गया था. इससे प्रशिक्षण दिया जाता था. झारखंड अलग होने के बाद यह ग्लाइडर वीटी जीएलवी झारखंड को मिला. पहले यह रांची में था, फिर इसे दुमका भेज दिया गया. जहां पायलट प्रशिक्षण के लिए इसका इस्तेमाल होता था. झारखंड सरकार के पास दो मोटर ग्लाइडर भी हैं.

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