दुमका से जुड़े आठ मामलों की पड़ताल हो गयी तेज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Aug 2018 12:46 AM
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दुमका-रांची : रांची में मिशनरीज ऑफ चैरिटी निर्मल हृदय संस्था में बच्चों की खरीद-फरोख्त के मामले सामने आने के बाद दुमका से जुड़े आठ मामलों की पड़ताल तेज कर दी गयी है. दो मामलों में यह बात सामने आयी है कि अविवाहित लड़कियों का प्रसव होने के बाद उन्हें उनके शिशु को नहीं सौंपा गया. […]
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दुमका-रांची : रांची में मिशनरीज ऑफ चैरिटी निर्मल हृदय संस्था में बच्चों की खरीद-फरोख्त के मामले सामने आने के बाद दुमका से जुड़े आठ मामलों की पड़ताल तेज कर दी गयी है. दो मामलों में यह बात सामने आयी है कि अविवाहित लड़कियों का प्रसव होने के बाद उन्हें उनके शिशु को नहीं सौंपा गया. बाल कल्याण समिति दुमका ने दो मामलों में ऐसी अविवाहित माताओं का बयान लिया है.
इसमें खुलासा है कि 2016 में तीन महीने तक उन्हें निर्मल हृदय में रखा गया था और प्रसव के उपरांत उन्हें उनके बच्चे दिये बगैर वापस भेज दिया गया. ये लड़कियां गर्भपात कराने के मकसद से निर्मल हृदय तक पहुंची थीं, पर चार-पांच माह का गर्भ रहने की वजह से वहां रख लिया गया था.
रांची में जब बाल कल्याण समिति ने मामले की जांच शुरू की थी, तब संस्था द्वारा यह जानकारी दी गयी थी कि ये बच्चे अपनी माताओं के साथ वापस लौट गये हैं, लेकिन जब बच्चों की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आने लगा, तब यह आशंका जाहिर करते हुए दुमका के डीसी-एसपी को रांची के डीसी द्वारा पत्र भेजा गया कि कहीं इन बच्चों को भी अपनी जैविक माताओं से अलग कर अन्यत्र बेच तो नहीं दिया गया.
इसलिए इनके मामलों का सत्यापन हो. पत्र में जिन आठ अविवाहित माताओं का जिक्र किया गया है, उनमें से छह जामा थाना क्षेत्र, एक टोंगरा व एक रामगढ़ थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं. सभी आदिवासी हैं.
दुमका से ही पता देकर भेजा गया था रांची : बाल कल्याण समिति के चेयरमैन मनोज कुमार साह की मौजूदगी में यह बयान लिया गया. समिति के सदस्य रंजन कुमार सिन्हा ने बताया कि एक पीड़िता जो दुमका के जामा प्रखंड की रहने वाली है, उसने बयान दिया है कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ था, जिसके बाद वह गर्भवती हो गयी थी.
तब उसकी उम्र महज 13 साल थी और वह सातवीं में पढ़ती थी. उसने यह बात छिपाये रखी. चार महीने बाद जब परिजनों को जानकारी हुई, तो दुमका में उसका गर्भपात कराने का प्रयास किया. फिर उसे उर्सला नर्सिंग होम ले गये, जहां से दुमका के कुरुवा में संचालित मिशनरीज ऑफ चैरिटी भेज दिया गया और फिर वहां से ही निर्मल हृदय रांची का पता देकर भेज दिया गया था.
उल्लेखनीय है कि इससे पहले जिसका बयान हुआ था, वह टोंगरा की रहने वाली थी और दुमका में रहकर प्लस टू की पढ़ाई करती थी. उसके साथ दुमका में यौन शोषण हुआ था. उसके साथ भी ऐसा ही हुआ, प्रसव के बाद बच्चा नहीं दिया गया.
कोट
पुलिस द्वारा एक लड़की को लाया गया है, उसका बयान लिया गया है. बयान लेकर पत्र के अनुरूप रिपोर्ट भेज दी जायेगी. लड़की के पुनर्वास को लेकर भी बाल कल्याण समिति प्रयास करेगी.
मनोज कुमार साह, चेयरमैन, सीडब्ल्यूसी, दुमका
निर्मल हृदय रांची में आठ लड़की दुमका की थी. एक लड़की का बयान लिया गया है. उसने बयान में कहा कि वह रांची गर्भपात कराने गयी थी. वहां बच्चे को जन्म देने के बाद उसे रख लिया गया, वह खाली हाथ लौट गयी.
रंजन कुमार सिन्हा, सदस्य, सीडब्ल्यूसी, दुमका
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