पूर्व मंत्री योगेंद्र साव जेल से छूटे

Updated at : 10 Jan 2018 5:13 AM (IST)
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पूर्व मंत्री योगेंद्र साव जेल से छूटे

जेल से निकल दुकान में जाकर ली चाय की चुस्की आज हजारीबाग कोर्ट में होंगे पेश विधायक निर्मला देवी व पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को रहना होगा भोपाल में दुमका : पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को बड़कागांव थाना कांड संख्या 228/16 में सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत दिये जाने पर उन्हें मंगलवार की शाम दुमका […]

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जेल से निकल दुकान में जाकर ली चाय की चुस्की

आज हजारीबाग कोर्ट में होंगे पेश
विधायक निर्मला देवी व पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को रहना होगा भोपाल में
दुमका : पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को बड़कागांव थाना कांड संख्या 228/16 में सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत दिये जाने पर उन्हें मंगलवार की शाम दुमका सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया. शर्त रखी गयी है कि उन्हें भोपाल में रहना होगा. हजारीबाग से उन्हें लेने पहुंचे उनके बेटे अंकित राज ने बताया कि न्यायालय के आदेश का पालन होगा, लेकिन फैसले पर पुनर्विचार के लिए वे लोग कोर्ट में गुहार लगायेंगे. अंकित ने बताया कि आज उनकी मां भी रामगढ़ जेल से रिहा हो रही है. चूंकि सदन चल रहा है. इसलिए सदन के बाद वह भी भोपाल जायेगी. बुधवार को श्री साव हजारीबाग के कोर्ट में पेश होंगे.
श्री साव के जेल से निकलने के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल-माला से लाद दिया. श्री साव जेल से निकलने के बाद भरत नाम के एक चाय दुकानदार के यहां जाकर पानी पी. फिर चाय की चुस्की ली. मौके पर कांग्रेस नेता मनोज अंबष्ट, महेश राम चंद्रवंशी, डॉ सुशील मरांडी, संजीत कुमार सिंह आदि मौजूद थे.
सीसीए प्रस्ताव सोमवार को हुआ था खारिज
सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद योगेंद्र साव पर सीसीए लगाने का प्रस्ताव हजारीबाग जिला प्रशासन ने भेजा था. योगेंद्र पर दर्ज दो अापराधिक मामलों में उनकी रिहाई हो चुकी है. बावजूद दर्ज मामलों व उनकी सक्रियता की बात कह कर सीसीए लगाने की उनपर अनुशंसा हुई थी. सोमवार को सीसीए बोर्ड के अध्यक्ष हाईकोर्ट के जस्टिस एबी सिंह, सदस्य रजिस्ट्रार जेनरल ने इस प्रस्ताव पर सुनवाई की थी. मामले को सीसीए लगने योग्य न पाते हुए खारिज कर दिया था.
बेटे ने कहा : कानून का दुरुपयोग कर रही सरकार
जेल गेट के बाहर मीडिया से बातचीत में योगेंद्र साव के बेटे अंकित ने कहा कि उनके माता-पिता को झूठे मुकदमा लाद कर साल भर से जेल में रखा गया था. जब भी जमानत मिली, तो नया नया केस लादा गया. चौथी बार सीसीए लगाने की कोशिश हुई. सरकार हमेशा से उनके पिता को अपराधी बनाना चाहती रही है. कानून का दुरुपयोग कर रही है. उन्होंने कहा कि जन आंदोलन के केस में जमानत रद्द कराने सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गयी. वहां पर भी जमानत रद्द करा दी गयी. हालांकि वहीं से उन्हें अंतत: जमानत मिली. अंकित ने कहा कि पूरे राज्य में जमीन की लूट चल रही है. हर जगह आंदोलन हो रहा है.
कारपोरेट घराने के साथ मिलकर यह सरकार पूरे झारखंड को बेचने की कोशिश में लगी है. पिता आवाज उठाते रहे हैं. रैयतों के आवाज बनते रहे हैं. उसने कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान हार्स ट्रेडिंग के स्टिंग मामले में भी पिता को परेशान किया गया. उन्हें धमकी भी दी गयी थी. कहा गया था कि मुकदमा में फंसा दिया जायेगा. अंकित ने कहा कि सरकार के जुल्म पर उनके पूरे परिवार के साथ जनता रही.
मां व पिता को अपराधी बनाना चाह रही सरकार
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