शत-प्रतिशत सेविका-सहायिकाओं के घर में हो शौचालय : उपायुक्त

Updated at : 05 Jul 2017 3:59 AM (IST)
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शत-प्रतिशत सेविका-सहायिकाओं के घर में हो शौचालय : उपायुक्त

आइसीडीएस की बैठक में डीसी ने 15 अगस्त की डेडलाइन तय की कहा पर्यवेक्षिका कार्यशैली में सुधार लायें, वरना कार्रवाई को रहें तैयार बच्चों के आधार सिडिंग कार्य में लापरवाही पर जताया असंतोष दुमका : जिले के उपायुक्त मुकेश कुमार की अध्यक्षता में समेकित बाल विकास परियोजना की समीक्षा बैठक समाहरणालय स्थित सभागार में हुई. […]

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आइसीडीएस की बैठक में डीसी ने 15 अगस्त की डेडलाइन तय की

कहा पर्यवेक्षिका कार्यशैली में सुधार लायें, वरना कार्रवाई को रहें तैयार
बच्चों के आधार सिडिंग कार्य में लापरवाही पर जताया असंतोष
दुमका : जिले के उपायुक्त मुकेश कुमार की अध्यक्षता में समेकित बाल विकास परियोजना की समीक्षा बैठक समाहरणालय स्थित सभागार में हुई. इसमें उपायुक्त ने बच्चों के आधार सिडिंग के कार्य पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों का पंजीकरण के कार्य की रफ्तार बढ़ायी जाय तथा उनके अभिभावकों के साथ बैठक कर उन्हें प्रज्ञा केंद्र ले जाकर आधार पंजीकरण कराने हेतु प्रेरित करें. उन्होंने कहा कि ‘मेरा आधार मेरा खाता’ अभियान इस जिले में चलायी जाय.
जिसमें छोटे बच्चों का आधार पंजीकरण मुख्य लक्ष्य हो. उन्होंने ऑनलाइन एमपीआर जेनरेशन में वृद्धि लाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि सभी महिला पर्यवेक्षिका, सेविका सहायिका अपने कार्य शैली में सुधार लायें, अन्यथा उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी. सभी सेविका एवं सहायिका के घर में शौचालय निर्माण का कार्य 15 अगस्त 2017 तक शत- प्रतिशत सुनिश्चित करवाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि स्वच्छता सरकार की पहली प्राथमिकता है. सभी सीडीपीओ को यह भी निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यों में अविलंब सुधार लायें. आइसीडीएस एक मात्र राष्ट्रीय कार्यक्रम है जो छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों की जरूरतें पूरी करता है.
यह छोटे बच्चों को पूरक पोषाहार, स्वास्थ्य सुविधा और स्कूल पूर्व शिक्षा जैसी सुविधाएं एकीकृत रूप से पहुंचाता है. बच्चों की स्वास्थ्य और पोषण की जरूरतें अपनी मां से अलग पूरी नहीं हो सकती. इसलिए कार्यक्रम में किशोरी बालिकाओं, गर्भवती महिलाओं और धातृ माताओं के प्रमुख उद्देश्यों को पूरा करना है.
उपायुक्त ने कहा कि आइसीडीएस के तहत छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, समुचित मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास की नींव डालने, मृत्यु, बीमारी, कुपोषण और स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति में कमी लाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये जाते हैं. लिहाजा इन कार्यों को संवेदनशीलता के साथ किये जाने की जरूरत है. बैठक में उप विकास आयुक्त शशि रंजन, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्वेता भारती, सभी प्रखंड बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, सभी महिला पर्यवेक्षिका आदि उपस्थित थे.
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