ट्रक में बाइक का नंबर लगा ढो रहे थे कफ सिरप, नशे के लिए बेचने की थी तैयारी

Updated at : 14 Jul 2024 1:30 AM (IST)
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ट्रक में बाइक का नंबर लगा ढो रहे थे कफ सिरप, नशे के लिए बेचने की थी तैयारी

सीआइडी जांच में खुलासा. बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के एक गोदाम से बरामद हुई थीं 24560 बोतलें, प्रतिबंधित कफ सिरप जब्ती मामले में गुजरात का कनेक्शन आया सामने

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धनबाद के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र स्थित एक गोदाम से बरामद 24560 बोतल प्रतिबंधित कफ सिरप युवकों को नशे के लिए बेचा जाना था. इस बात का खुलासा सीआइडी डीआइजी ने केस के अनुसंधान में आये तथ्यों के आधार पर तैयार अपनी रिपोर्ट में किया है. धनबाद में जब्त कफ सिरप के बिल में सैली ट्रेडर्स का उल्लेख है. गुजरात के मोरबी में जब्त कफ सिरप की बोतल में भी सैली ट्रेडर्स को आपूर्ति किये गये बैच नंबर की शृंखला की कड़ी प्रतीत होती है. बिल में वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर और आजमगढ़ की दवा दुकानों का उल्लेख है. इसलिए यह संदिग्ध प्रतीत होता है. कई बिल में शहर के नाम का उल्लेख नहीं है. अब तक के अनुसंधान से यह स्पष्ट है कि सुपर स्टाॅकिस्ट लाइसेंस के नाम पर रांची के तुपुदाना स्थित सैली ट्रेडर्स के नाम पर कफ सिरप को फर्जी कागजात के आधार पर अवैध तरीके से बाजार में भेजा जाता है, ताकि किशोर एवं युवा बिना चिकित्सक के पर्ची की दुकान से इसे खरीदकर नशे के रूप में सेवन कर सकें.

युवा क्यों करते हैं नशे के लिए इस्तेमाल :

सिरप का प्रयोग नशे के लिए इसलिए किया जाता है, क्योंकि हेरोइन, अफीम और चरस की तुलना में यह अधिक सस्ता है और आसानी से उपलब्ध हो जाता है. सीआइडी ने अबतक के अनुसंधान में शुभम जायसवाल एवं मोरबी गुजरात के भोला प्रसाद को कफ सिरप के अवैध धंधे के गिरोह का मुख्य सरगना बताया है. केस में उमेश कुमार का सत्यापन किया जा रहा है, जबकि उपेंद्र सिंह की संलिप्तता पायी गयी है. जिस ट्रक से गोदाम में कफ सिरप पहुंचाया गया था. उस ट्रक का नंबर दोपहिया वाहन के नाम पर निबंधित मिला है.

गुजरात पुलिस ने धनबाद में की थी छापेमारी :

गुजरात पुलिस ने कुछ माह पूर्व 30 हजार बोतल प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद किया था. साथ ही ट्रक चालक भी गिरफ्तार किया गया था. इसी को साथ लेकर गुजरात पुलिस धनबाद के बरवड्डा थाना क्षेत्र स्थित एक गोदाम में छापेमारी करने आयी थी. जहां से उक्त कफ सिरप मिले थे. बरवाअड्डा थाना की पुलिस ने 15 मार्च को एक केस दर्ज किया था. इसका वर्तमान में अनुसंधान सीआइडी कर रही है.

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